ब्रज की दुनिया

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braj kishore singh


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दलालों से सावधान

Posted On: 1 May, 2010  
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पत्नी चालीसा

Posted On: 22 Apr, 2010  
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के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

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के द्वारा: achyutamkeshvam achyutamkeshvam

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के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

ब्रिज किशोर जी,नमस्ते, बहुत सुन्दर ! ऐसे सर फिरे देश के प्रति नफ़रत और चीन और पकिस्तान से नजदीकी बढ़ाने वाले लोगों से तो बचकर रहने में ही भलाई है ! मैं तो इन सामयवादियों से उसी दिन से नफ़रत करता हूँ, जब इन देश के दुश्मनों ने खुले आम १९६२ में चीन का समर्थन किया था !! मुझे तो कांग्रेसियों के रुख पर भी अचम्भा होता है की कल तक तो ये वामपंथियों के सख्त खिलाफ थे और आज जब देश की सत्ता छीन गयी, ये दुश्मन से दोस्त बन गए ! पर जनता तो जागरूक है ! ये लोग खाते देश का अन्न है, रहते यहां हैं, सरकारी नौकरियों के लिए अल्प संख्यक, ओबीसी, यस सी, एसटी बनकर यहीं सरकारी नौकरी का लुफ्त उठाते हैं चीन और पाकिस्तान के के गन गान करते हैं ! विस्तृत लेख के लिए साधुवाद ! हरेंद्र जागते रहो

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

आदरणीय ब्रज किशोर सिंह जी, सादर अभिवादन! मैं आपको शुरू से पढता आ रहा हूँ, आपके व्यक्तिगत समस्याओं से सम्बंधित आलेख भी पढ़े हैं. राजनीतिक मसलों पर हमारे और आपके विचार भिन्न हो सकते हैं पर आपका यह ब्लॉग मुझे सबसे ज्यादा प्रिय लगा. आपने सत्य को लिखा है. अपनी समझ,बुद्धि का इस्तेमाल किया है. आप भाजपा का भला चाहते हैं. भाजपा को आपके सुझावों पर गौर करना चाहिए. हम सभी पूरे भारत का भला चाहते हैं. चाहे मोदी जी हों या नीतीश जी, या फिर केजरीवाल ही क्यों न हो. हरेक में अच्छाई बुराई निहित होती है. हमें हंस की तरह नीर-क्षीर विवेकशील हों चाहिए. आपका बहुत बहुत अभिनंदन ...आप इस आलेख को विभिन्न मंचों पर प्रकाशित करें. हो सके तो भाजपा कार्यालय में भी भिजवा दें. शायद कुछ परिवर्तन हो उनके सोच में, जिनके बारे में आपने लिखा है. सादर बधाई! आडवाणी जी आदि बुजुर्ग नेताओं से भी बीच बीच में राय मशविरा कर लेंना चाहिए.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम भाई ब्रिज किशोरे सिंह जी बहुत ही सार्थक और विस्तृत लेख के लिए धन्यवाद्.बिहार के चुनाव में कुछ गलतियां हुई स्थानीय लोगो को प्रचार  चोटी  चोटी सभावो द्वारा जा कर अपनी बात समझनी चैये.क्या लालू ने असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं किया क्या वह अपराधी नहीं था क्या व अपने बच्चो को राजनीती में नहीं लेन के लिए सब कर रहा क्या ये गटबंधन सिद्धान्तहीन नहीं था.लेकिन गलतियां हुई परन्तु जीतने वाले के सब गलतिया माफ़  हारने वाली की हजारो गलतियां.अब असम,केरला  के लिए नहीं रणनीति तैयार हर अभी से काम करे.कर्णाटक में हिन्दू को मुसलमानों ने मारा पूरा मीडिया चुप दादरी के मामले को क्यों इतनी टूल याह हिन्दुओ को दुसरे दर्जे का नागरिक बनाने की योजना है वे यदि कुछ मांगते सम्रदाहिक कहा जाता मुसलमानों की हर बात सबसे ज्यादा असहिसुनता बंगाल,केरला,असम,कर्णाटक और उत्तर प्रदेश में है वह के लिए कोइ नहीं बोलता मुस्लिम नेता ऐसे राष्ट्रद्रोही व्यान देते कोइ नहीं बोलता इंग्लिश मीडिया और कुछ टीवी होंदु/बीजेपी विरोधी है इनके खिलाफ ज़हर उगलते है.मिस कॉल वाली सदसय्ता का हम भी इंतज़ार कर रहे देश में गलत वातावरण करने के पीछे विदेशी साजिस है.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आप का विश्लेषण मुझे बहुत अच्छा और स्पष्ट लगा, कहाँ -नीतीश ,मोदी के विरोध में NDA से अलग हो गए ,उस वक्त मोदी जी ही देश के योग्य नेता थे ,जिन्होंने बीजेपी जैसे तितर -बितर पार्टी को एकजुट और अनुशासन के सूत्र में बांध दिया और कहाँ अब ,नीतीश,लालू के साथ में जाकर आत्म अवनति की और अग्रसर हैं ,यह तो आगे आने वाला समय ही बताएगा,नीतीश की चलती है या लालू की | वैसे अपने बड़बोले नेताओं और २-४ अन्तर्कलही नेताओं की बजह से भी बीजेपी को बहुत नुक्सान हुआ | LJP /HAM /RLSP / जैसी पार्टियों को बीजेपी में MERGE करने की आवश्यकता है | जितनी अधिक पार्टियां ,उतना अधिक सामाजिक विघटन |अंत में सब एक तो होते ही हैं,सरकार बनाने के लिए ,बेहतर है पहले से ही एक रहो | सादर आदरणीय |

के द्वारा: pkdubey pkdubey

जय श्री राम सिंह जी लेख के लिए धन्यवाद् लेकिन मोदीजी के पास कोई अलादीन का चराग नहीं जो एक मिनट में कार्य हो जाये.कालाधन और जजों की नियुक्ती का मामला सर्वोच्च न्यालय में है.बीजेपी शासित प्रदेशो में भ्रष्टाचार बहुत कम है और विकास कार्य भी हो रहे.भ्रष्टाचार में लगाम है एक दो उदाह्ररण सही तस्बीर नहीं दिखाते.लोग तो भगवन में भी गलतियां निकलते.१५ लाख देने का वायदा नहीं था केवल धन दिखने के लिए उदहारण था,आप हिन्दुओ को गुलाम बना कर रखना चाहते देश के मुसलमान और ईसाई नेताओ के व्यान भी देखना चैये.विधान सभा या नगरनिगम चुनावो की हार से फर्क नहीं पड़ता परन्तु ममता की गूंदगरी भी देखिये.उम्मीद है नहीं सरकार आपके सुझावों पर ध्यान देगी.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

प्रिय ब्रज किशोर जी, सादर अभिवादन! आप बीच बीच में अपना दर्द हम सबके बीच बाँटते रहते हैं. इसके पहले भी आपने सूचना दी थी की आपके माता पिता आपसे रूठ कर चले गए हैं तब मैंने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की थी शायद. आज आपकी जिंदगी की दुःख भरी दास्ताँ पढ़कर मेरे आँख में आंसू छलक आए... आपसे मेरा परिचय इसी मंच पर हुआ फिर आप मेरे फेसबुक मित्र भी बने. आप हाजीपुर टाइम्स से सम्बंधित हैं ... आप अजीपुर के हैं और मैं पटना का पड़ोसी होने या कहें जिला जेवारी होने से सहनुभूति तो होती ही है ...पर इसके अलावा मैं कर भी क्या सकता हूँ. यही निवेदन करता हूँ आप अच्छे लेखक और पत्रकार हैं. अपना काम मन लगाकर करें मिहनत करनेवालों को आज न कल फल मिलता है ऐसी मान्यता है आपके माता पिता को भी समझ जरूर आएगी ऐसा मैं समझता हूँ ...ईश्वर पर भरोसा रक्खें और माता पिता का मन से आदर करें ...कभी न कभी उनका माँ जरूर पसीजेगा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: MANOJ SRIVASTAVA MANOJ SRIVASTAVA

मित्र,फिर इसके अलावे इस्लाम है क्या यही बता दीजिए। महिलाओ के लिए यदि इस धरती पर नरक या दोखज कोई जगह है तो वो सऊदी अरब है सऊदी अरब में महिलाओ के हालत बदतर है ... यहाँ इन्हें ड्राइविंग करने की इजाजत नही है .. यदि कोई महिला कार चलाते पकड़ी जाती है तो उसे १०० कोड़े मारने की सजा दी जाती है | कोई भी महिला बलात्कार का केस दर्ज नही करवा सकती क्योकि उसे पहले ४ पुरुष गवाह लाने पड़ेंगे .. यदि किसी महिला ने बलात्कार का केस दर्ज किया और ४ गवाह नही लाई तो उसे १० साल जेल और २०० कोड़े की सजा मिलती है ... और सऊदी अरब में महिलाओ की गवाही नही मानी जाती ..क्योकि कुरान के अनुसार महिलाओ की बात पर यकीन नही किया जाता .... चार महिलाओ की गवाही को एक पुरुष की गवाही के बराबर माना जाता है | कोई भी महिला अकेले बाहर नही निकल सकती भले ही उसकी उम्र कितनी भी क्यों न हो. बुजूर्ग महिलाओ को बाहर जाते समय अपने पति या पुत्र का लिखित परवानगी साथ रखना जरूरी होता है .. सऊदी अरब के कानून के अनुसार लडकियाँ १० से १२ साल की उम्र में शादी योग्य हो जाती है ..इसलिए सऊदी अरब में लडकियों को १० साल की उम्र में ही किसी ७० साल के शेख के हाथो तबाह होने के लिए निकाह कर दिया जाता है .. महिलाओ को कोई भी खेल देखने की इजाजत नही है ... यहां तक की दो साल पहले एक डेनिश पुरुष को इसलिए सऊदी अरब छोड़ने के आदेश दे दिए गये थे क्योकि वो बहुत स्मार्ट दिख रहा था .. सऊदी कानून के मुताबिक किसी लड़की को सऊदी से बाहर जाने के लिए उसके साथ उसका पिता होना जरुरी है .. सिर्फ माँ हो तो भी सऊदी कानून उसे बाहर जाने की इजाजत नही देता | कोई भी महिला भले ही वो मर जाए लेकिन उसे कोई पुरुष डाक्टर देख नही सकता ..और यदि स्कूल में किसी लड़की की तबियत खराब हो जाये तो तब तक उसके पिता की मंजूरी न मिले तब तक स्कूल डाक्टर नही बुला सकता |

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

गांव से बड़ा बाराती अकल से बड़ा हाथी एकता से बड़ी दूसरी कोई ताक़त नहीं होती इस लिए महात्मा गांधी से लेकर आज के एक गरीब की हत्या भी हत्या ही है मगर इंसाफ उसी को मिलता है जिसके पास पैसा ताक़त पैरवी और दबदबा है बाक़ी लोगों की जाने बेमानी और बेकार हैं वो इस लिए के हमारी कमज़ोरी वो जानते है हम एक हज़ार एक साथ खड़े हो जाएँ तो देश के नेता हमें दो मिनट में दस पार्टी में बाँट कर हमें अलग अलग दस गोल बना कर हमहि को दस मिनट में लड़ा कर हमारी ताक़त को तोड़ कर हमारी ताक़त को शराब समझ कर पि जाएंगे और हमसे अपने घर का दरवानी भी कराएँगे क्यूंकि हमारी एकता उनकी आज़ादी के लिए खतरा है . बस यही वजह है के हमारे साथ इंसाफ नहीं होता . हम आपके साथ हैं

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

मित्रों,पूरी दुनिया के मुसलमानों को देर-सबेर यह समझ लेना होगा कि आज की दुनिया में सबसे ज्यादा मुसलमान ही अकालमृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं। मरनेवाले भी अल्लाह हो अकबर कहकर मर रहे हैं और मारनेवाले भी अल्लाह हो अकबर के नारे लगाकर उनको मौत के घाट उतार रहे हैं। मैं नहीं मानता कि कोई भी किताब ईश्वर की लिखी हुई हो सकती है और उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता। किताब या धर्म ने इंसान को नहीं बनाया बल्कि इंसानों ने किताबें लिखीं और धर्म बनाए यहाँ तक कि ईश्वर को भी बनाया। फिर क्यों कुरान में संशोधन नहीं हो सकता? जब कुरान को माननेवाले ही कुरान के पालन के नाम पर एक-दूसरे को मार डालेंगे तो फिर मानव-समाज ऐसे धर्मग्रंथ को लेकर क्या करेगा? मैं पहले भी अपने आलेखों जैसे- अफजल गुरू जेहाद का फल था जड़ नहीं,इराक में इस्लाम कहाँ है?,व्यक्ति नहीं विचारधारा है ओसामा में मुसलमानों से इस तरह का निवेदन कर चुका हूँ लेकिन तब से न जाने कितने ही लाख मुसलमानों को मुसलमान मार चुके हैं और अभी तक तो मेरी अपील बेअसर रही। जाने कभी मेरी अपील का असर होगा भी कि नहीं?! आपकी बातों से सहमत!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आपका हर लेख पढ़ कर बहुत ही दुःख होता है के आज़ाद और धर्मनिर्पेक्छ देश का वासी हमेशा एक तरफ़ा और अज्ञान बात लिखता है अगर मैं एक तरफ़ा बात करूं तो शायद बहस लम्बी हो मगर सीधी बात ये है के राज तंत्र और लोक तंत्र में क्या अंतर है आपको मालूम नहीं जहाँ तक औरंगज़ेब की बात है तो बनारस के पंडित रामलाल के खानदान से कोई पूछे के पंडित रामलाल के दिल में औरंगज़ेब की मोहब्बत और इन्साफ पर नाज़ क्यों हुआ . खैर पहले आज़ाद भारत का मतलब समझो फिर जो चाहे इन्साफ से लिखो परवीन तोगड़िया और दूसरे लोग जो दूसरे धर्म के लोगों को गाली देते हैं वो आपको बहुत पसंद है यही सोच अगर १९४७ में होता तो देश आज भी ग़ुलाम रहता अच्छा हुआ उस समय ये सब दल नहीं थे अगर ये सेना और दल होते तो आज भी हमारा प्यारा देश नफरत और ग़ुलामी के दलदल में ही रहता . इमाम हुसैन कादरी सीवान बिहार deartellme2006@yahoo.co.in

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

Since 2005,BJP fought four elections in the leadership of Nitish Kumar & NDA improved its tally in every elections. In all those elections many stalwarts of BJP also campaigned for NDA candidates except Mr Modi . All the colloquies of Mr.Kumar were working smoothly. But when Modi took the command of BJP , then on his initiatives they started non cooperating.When Mr Kumar called a Cabinet meeting, then BJP ministers had not attended the same & told that they would not do public work on Sunday. They must know that even 4th grade employee make this execuse . Can they show any law . I expect your opinion on this point. 2.(i) Modi ji won the parliament election on false promises.He told that Achey Din Ayenge ,but cost of most of essentials commodities produced by companies have increased almost 20-25 % , because he had taken handsome amounts from those before election. Its reactions were seen in the mid term polls in different states.I expect your comment over this. ( ii ) Modiji has not bring any black money till date, but Manjhi government captured black money of Giriraj Singh in a day, when those were stolen from Singh's house. Police recovered more than Rs 111,00000/- & some dollers too though report of theft was only Rs 85000/- initially. Irony of the fact is that the money recovered were bearing Gujrat Bank seals. Hope you will explain to us. ( iii ) It appears very fine when Modiji tells that he is against Parivarbad. Irony of the situation is that he had allotted 7 seats to LJP out of which 3 SC seats against which all were allotted to Ramvilas Paswan's close family members. In SC's no any capable member were among SC's.BJP also fought UP parliamentry election in which APNA Dal was in NDA & they performed very fine in eastern UP too & a sitting MLA of APNA dal won the election. But when by election happened MP's mother was defeted the poll.Thouhg that assembly segment is part of Varanasi Parliamentry area.I expect your valuable comment. ( iv )In NDA only Muslim candidate had won Khagaria Parliamentry from LJP ticket &in people's eye he is comparitably honest among LJP candidates.Mr Sahnabaj Hussain deafeted from Bhagalpur, from where BJP/Janta Party was winning perhaps since 1977 though BJP had done well in the other part of BIHAR on the falls promise of Namo (who told that BIhar will deserves special status). Not only this BJP loose even the Bhagalpur Assembly seat in the by election.Namo is doing for Gujrat & not for other backward States.Namo is going to start first Bullet train from Ahmedabad to Mumbai which has alredy very good Air connection & more than two dozen Mail/Express trains.In the same cost or a little more most of importent cities may be connected with trains with speed of about 200 KPH. Please comment. ( v ) Come to Delhi,Mr Kejribal's image & intention is far better than other leading politicians.He made minority Govt.in Delhi & he announced 18 priority works in which Lokpal videyak was on the top in which Congress supported it. When he come with the bill in the House, both Congress & BJP opposed it on technical execuse not on moral ground & they combined told that "We are Forty ( in public eyes they are forty thives ").Even though Congress has not withdra its support from Govt.i.e.Kejriwal Govt. was in mojority.Kejriwal reccomended for dissolving the House,but insane LG had not done so & inforced President'rule.When Kejriwal gone to SC,the insane LG is telling that BJP will form the Govt.though neither BJP is claiming nor LG is inviting the BJP.BJP is trying hard for Horse Trading but have not succeded till yesterday. Second thing is that BJP had won 32 seats in the assembly in the ledership of Mr Harswardhan (the cleanest face of Delhi BJP ).Now Harswardhan is Health Minister in Namo (who claims zero tolerance in corruption ) cabinet & he sifted one most honest & capable CVO ( Mr Chaturvedi) from AIIMS & posted a corrupt officer in his place withine two months of NDA Govt.One may imagine the fastnes of movement of the file in this case that twenty officers okayed it withine 24 hours but Namo is mum over it till yester day.Please take comment of Namo or your local MP through your Paper & kindly communicate me theough email. ( vi )"Bihar Nitish ki Jagir nagi hai balki Nitish ke SOnch aur karyon ki Jagir hai )".In Mr Nitish Kumar Govt.general public were filling relief only 5 to 10% oppressors were frightened.Mr Nitish Kumar had done better works even if BJP was not liking.This time also he will do what ever he says even though if his alliance partners against those works.Please wait for a year or so. I request you to give yourcomment on every points I mentioned above trogh your Paper & send me on mail. I shall be very thankful of you.Please! With kind Regards, Arjun Prasad

के द्वारा:

जय श्री राम क्योंकि इस्लाम बहुत देर से आया इसलिए उनके धर्म गुरों ने हिंसा का रास्ता चुना नहीं तो इस्लाम और अल्लाह के नाम पर बेगुनाहों की हत्याए कैसे हो सकती,जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कैसे कराया जाता या दूसरे के पूजा स्थलों को नास्ता कैसे किया जाता.यह धर्म नहीं क्रूरता है लेकिन नेहरूजी की वज़ह से देश्वशिओ को सब गलत चीजे सहन कर प् रही और देश के सबसे बड़े दुश्मन सेक्युलर ब्रिगेड और न्यूज़ ट्रेडर्स हैं जो मुसलमानो का समर्थन करते हैं.लव जिहाद को अंतर धर्म की शादी कहते है जो झूट के पुलन्दे से बढ़ कर कुछ नहीं है.यह लोग पाकिस्तान में हिन्दुओ की दुर्दशा में कभी आंसू क्यों नहीं बहते ?देश के जैचंद हैं.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

कमाल खान जी पर आपका यह लेख पढा । एक्बारगी विश्वास कर पाना मुश्किल था लेकिन वह रपट आपने देखी है इस्लिए विश्वास न करने का भी कोई कारण नही । दर-असल मैं जिस कमाल खान को जानता हूं वह 80 के दशक मे लखनऊ से प्रकाशित अमृत प्रभात  मे लिखा करते थे उस दौर मे मैं स्वयं कई क्षेत्रीय व राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं मे लिखा करता था । अमृत प्रभात से  एक लंबे समय तक मेरा भी बतौर लेखक जुडाव रहा है । तब वह एच.ए.एल. मे नौकरी करते थे तथा बाद मे नौकरी छोड कर पत्रकारिता मे ही रम गए । लेकिन तब वह एक ईमानदार और अच्छे लेखक माने जाते थे । लेकिन शायद समय बलवान होता है । वक्त ने उन्हें भी बदल दिया । जिस तरह की यह रपट उन्होने पेश की है यह एक पत्रकार की भला कैसे हो सकती है जिसे हर हाल मे सामाजिक और मानवीय मूल्यों का ही पक्ष्धर होना चाहिए । एक मजहबी आईने से देखे गये इस मुद्दे पर उनकी यह रिपोर्ट आलोचना की पात्र है । बहरहाल ऐसा करके कमाल खान जी ने कभी प्रिंट मीडिया मे अर्जित सम्मान को भी खोया है । बहरहाल इसे प्रकाश मे लाया जाना भी जरूरी था , जो आप्ने बखूबी किया ।

के द्वारा: एल.एस. बिष्ट् एल.एस. बिष्ट्

के द्वारा: abhishek shukla abhishek shukla

के द्वारा:

के द्वारा: abhishek shukla abhishek shukla

मित्रों,मैं यह नहीं कहता कि सरकार को गरीबों को मुफ्तखोर बना देना चाहिए लेकिन सरकार गरीबी को स्वीकार तो करे। संयुक्त राष्ट्र संघ कह रहा है कि दुनिया के सबसे गरीब लोगों की एक तिहाई आबादी भारत में है। भारत सरकार को भी आय-वर्ग के आधार पर तीन श्रेणियों का निर्माण करना चाहिए। एक वे जो वास्तव में अमीर हैं,दूसरे वे जो अभावों में जी रहे हैं लेकिन हालत उतनी खराब नहीं है और तीसरे में वे लोग हों जो बेहद गरीब हैं। हमारे हिसाब से रंजराजन समिति ने जो व्यय-सीमा अपनी रिपोर्ट में दी है उसके अनुसार जीनेवाले लोग बेहद गरीब की श्रेणी में ही आ सकते हैं गरीब की श्रेणी में नहीं। बढ़िया सवाल उठाया है आपने ब्रज किशोर जी

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

ब्रज जी आप जब भी सोचते हैं तो पता नहीं उल्टा ही क्यों सोचते हैं अगर एक बाप के चार बेटे हैं और उस में से एक वकील एक चोर एक महापुरुष बन जाए तो आप उस बाप को क्या कहेंगे इस्लाम धर्म के आदेश और नियम को पहले खूब ठीक से पढ़े और जो भी उस पर चलता है वो इस्लाम के अंदर रहता है जो इस्लाम के कानून और नियम के खिलाफ चलता है उसे इस्लाम से बाहर का रास्ता भी दिखता है यानी के इस्लाम के कानून में सब कुछ है ऐसा नहीं के जो दिल में आये करो मगर मुस्लमान ही रहोगे एक शब्द के गलत प्रयोग से वो मुस्लमान रहता ही नहीं इस्लाम से बाहर हो जाता है जब तक उस से तोबा न कर ले और फिर से इस्लाम के नियम को पालन करने के लिए वचन न दे अब जो गलत करते हैं इसका मतलब ये नहीं के उनके गुनाह साबित हो जाने के बाद भी आज़ाद हैं ऐसा नहीं मेरे दोस्त मैं आपको कभी इस्लाम के खास खास बात को रखूँगा और क़ुरान शरीफ किसी इंसान की लिखी हुयी किताब नहीं है इस लिए उस में एक शब्द को बदलने या हटाने वाला या नहीं मानने वाला वो इस्लाम से बाहर हो जाएगा यही वजह है के जन्म से लेकर किसी भी आयु के इंसान इसे पुरे आसानी से पुरे क़ुरान को अपने सीने में रख लेते हैं पूरी दुनिया के किसी भी हाफिज ( जो क़ुरान को सीने में रखता है ) को ज़बानी पढ़ने को बोलेंगे तो सब एक मंत्रा के अंतर के बिना पढ़ेंगे बिना देखे . दुनिया की कोई ऐसी किताब नहीं जिसे हर आदमी आसानी से एक एक शब्द को अपने सीने रख सके . इस लिए ज़ुल्म अत्याचार और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला इस्लाम से बाहर है उसे आप मुस्लमान मत समझें . इस्लाम का एक झलक देखने के लिए रमज़ान आ गया है जो सही मुसलमान है उनकी एकता और प्रेम को आसानी से देख सकते हैं .

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

ॐ जी आप स्वयं एकांगी दृष्टि से देख रहे हैं....लिखा तो सब कुछ सत्य ही है ....आप लेख की प्रतीक्षा की बजाय मंत्री के काम की प्रतीक्षा करें ..... सही तथ्य है कि अकबर नव-रत्नों से काम लेता था परन्तु अंतिम निर्णय उसी का होता था .....सेना में जनरल सेना के प्रत्येक अंग का विशेषज्ञ नहीं होता ..परन्तु उसका निर्णय सर्वमान्य होता है.... नगर में जिलाधिकारी प्रत्येक विषय का विशेषग्य नहीं होता परन्तु वही जिले को चलाता है .......कहीं भी किसी भी संस्था में  विभाग इन्चार्गे हर विषय का विशेषग्य नहीं होता परन्तु प्रत्येक का कार्य उसी की इच्छा व आज्ञा पर चलता है .... --- सच हैनेतृत्व के लिए दृष्टि चाहिए ....सिर्फ डिग्री नहीं....

के द्वारा:

ब्रज किशोर जी, निःसंदेह आप एक प्रबुद्ध लेखक हैं,लेकिन आप की कुछ बातों से ऐसा लगता है कि आप केवल एक ही पहलू देख रहे हैं,क्योंकि आप ने शिक्षा की प्रगति को 'शून्य' घोषित कर दिया .मंत्रियों को शिक्षित होना इसलिए भी आवश्यक है कि अफसरों के ऊपर निर्भर न होना पड़े.नीति-निर्धारण के लिए भी शिक्षित होना आवश्यक है.स्मृति ईरानी अनपढ़ नहीं हैं,लेकिन उनकी तुलना में आइंस्टीन को स्कूली शिक्षा विहीन बताना तथ्यों से परे है.महान कवियों और नेताओं से उनकी तुलना करना आप के एक-पक्षीय नज़रिये को ही दर्शाता है.इसके बजाय आप को स्मृति ईरानी के विशेष योग्यताओं से पाठकों को अवगत कराना चाहिए.हम आप के इस-विषयक अगले लेख की प्रतीक्षा करेंगे.धन्यवाद.

के द्वारा: OM DIKSHIT OM DIKSHIT

के द्वारा:

अब गाँवों में भी लोग घूम-घूमकर ढोलक-झाल की थाप पर होली नहीं गाते और न ही घर-घर जाकर होली ही खेलते हैं। अब गाँवों में भी नववधुओं को रंगों में स्नान नहीं करवाया जाता। अब गाँवों में भी हर घर में प्रणाम करने या अबीर लगाने पर लोग सूखे नारियल,किशमिश आदि मेवों का मिश्रण नहीं खिलाते। अब गाँवों में भी होली के बाद भी आपसी दुश्मनी और रंजिश बनी रहती है और उसमें कमी लाने के बदले होली उसमें बढ़ोतरी ही कर जाती है। जब पूरा समाज ही अपने मूल स्वरुप से भटक गया हो तो होली को तो अपने मूल स्वरुप से दूर हो ही जाना था,सो हुआ। बिलकुल सत्य कहा आपने ,अगर यही हाल रहा तो लोग इस परम्परा के निर्वहन से भी कतराएंगे | अश्लीलता ,भोंडापन ,व नशा नियति बन चूका है | बधाई

के द्वारा:

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

मित्र,हमें जो दिख रहा है वो जरूरी नहीं है कि आपको भी नजर आए। अरविन्द अगर कांग्रेस का आदमी नहीं है तो क्या आपने कभी कहीं देखा है कि जो पार्टी आपका सर्वनाश कर दे आप उसी को समर्थन दें। सोनिया या राहुत को खुद तो पीएम बनना नहीं है तो उसको कोई भी पीएम बने क्या फर्क पड़ता है उसको तो बस मोदी को रोकना है क्योंकि मोदी बहुत अच्छे प्रबंधक हैं और उनके शासन में देश का तेज आर्थिक विकास होगा। अरविन्द ने आज रामलीला मैदान में शपथ लेकर बेवजह करोड़ों रुपए खर्च कर दिए और आप उसको फिर भी आम आदमी कह रहे हैं तो आप जानिए। यह आदमी विशुद्ध नौटंकी कर रहा है और कोई वादा पूरा नहीं करेगा ऐसा अभी भी मेरा मानना है और जब तक मैं इसके शासन को न देख लूँ मैं उसको अच्छा नहीं मानूंगा।

के द्वारा:

ब्रिज किशोर जी,मुझे तरस आता है आपकी मानसिकता पर और उन पर जो आप जैसी धारणा पाले हुए हैं,शायद हम लोग इतना अधिक नकारात्क स्थिति में आ चुके हैं कि हर सही व्यक्ति भी चोर और धोखे बाज लगता है.कभी आपने सोचा है यदि इसी प्रकार गुलाम भारत में कुछ लोग आजादी का सपना नहीं देखतेऔर अपनी क़ुरबानी नहीं देते , तो क्या हम आज आजाद होते.जबकि देश हजारो वर्षों से गुलामी झेल रहा था .अतः हर व्यक्ति को शक कि निगाह से देखना बंद करना होगा और क्रन्तिकारी कदम उठाने वाले को हौसला देना होगा तब ही कुछ अच्छे कि उम्मीद की जा सकती है .हमें शुक्रगुजार होना चाहिए अरविन्द केजरीवाल का जो हमें कोई तो हमें आशा का दीप जलाते हुए दीख रहा है और उनसे अच्छे कि उम्मीद तो करनी ही चाहिए ,हर के पर शक करते रहेंगे तो नए प्रयोग कौन करेगा .

के द्वारा:

मित्र,माफ करिएगा उस समय मेरा बेटा रोने लगा था इसलिए मैं पूरा उत्तर नहीं दे पाया। मित्र,आपने मुझे संकरी सोंच वाला कहा है। ऐसा आपने किस आधार पर कहा है क्या आप स्पष्ट करेंगे। क्या ऐसा इसलिए तो नहीं है क्योंकि मैं धर्म,जाति,भाषा और क्षेत्र के आधार पर राजनीति का प्रखर विरोधी रहा हूँ? क्या ऐसा इसलिए तो नहीं है क्योंकि में सनी लियोन और समलैंगिकता का विरोध करता हूँ? या फिर ऐसा इसलिए तो नहीं है क्योंकि मैं भी व्यवस्था परिवर्तन चाहता हूँ और वास्तव में चाहता हूँ सिर्फ कोरी बातें नहीं करता? या चाहे धर्म हो या राजनीति मैं कोई और क्षेत्र मैं बगुला भगतों का सर्वनाश चाहता हूँ? अगर ऐसी सोंच रखना संकरी सोंच की निशानी है तो हाँ मैं एक संकरी सोंच वाला व्यक्ति हूँ और मुझे इस बात का गर्व है।

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

मित्र,मेरे पास आपके लिंक को पढ़ने का अब तक अवकाश नहीं मिल पाया है इसलिए मैं प्रतिक्रिया भी नहीं दे पा रहा हूँ। जहाँ तक वर्तमान भाजपा द्वारा हिन्दू कार्ड खेलने का प्रश्न है तो लगता है कि आपने मोदी जी के भाषण नहीं सुने जिनमें वे लगातार सबके विकास की बातें कर रहे हैं। तौकीर रजा ने तो समर्थन के लिए यही शर्त ही रखी थी कि आप बटाला हाऊस मुठभेड़ की जाँच करवाएंगे तो हम आपको समर्थन देंगे। तौकीर ने तो समर्थन दे दिया तो क्या अरविन्द ने उसकी इस शर्त को मान लिया था? यह बात आज की भाजपा को भी मालूम है कि जनता की राम-मंदिर आदि में रूचि नहीं है इसलिए वो भी इस चुनाव में उस पर बात नहीं करने जा रही है और चारों राज्यों में बातें की भी नहीं सिर्फ विकास की बातें की। भाजपा को जब जनता ने सरकार बनाने का जनादेश दिया ही नहीं और सिर्फ 10 सीटें ज्यादा दीं तो वो कैसे सरकार बना ले। अगर इस चुनाव में किसी को जनादेश मिला है तो वो आप है क्योंकि उसके शून्य से बढ़कर 28 सीटें मिली हैं। वर्तमान युग गठबंधन का युग है इसलिए जब कभी भी अरविन्द सरकार बनाएंगे तो उनको उन्हीं पार्टियों की मदद लेनी होगी जिनके खिलाफ वे चुनाव लड़ेंगे। अगर दोबारा में भी किसी को बहुमत नहीं आया तो क्या दिल्ली की जनता को कभी लोकप्रिय सरकार का सुख नहीं मिलेगा? जिस तरह आपको मुझसे उम्मीद नहीं है क्योंकि मैं अतिआक्रामक हूँ तो मुझे केजरीवाल से भी कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि वो न सिर्फ अतिआक्रामक है बल्कि फरेबी और दगाबाज भी है जो मैं नहीं हूँ। यकीन न हो तो आप मेरे घर आकर मुझसे मिल सकते हैं।

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

आपसे भाजपा के बारे में मैंने कुछ सवाल किए थे महोदय...अगर आपने ध्यान दिया हो !! और एक लिंक पर प्रतिक्रिया भी माँगी थी....अगर आपने पढ़ा हो तो !! . अब इसमें कौन सी अल्पसंख्यक तुष्टीकरण एवं समाज को बाँटने की राजनीति हो गई जनाब ? क्या उन्होंने किसी जाति, क़ौम या धर्म के लोगों से अलग से कोई वादा किया था ? और अगर आप इनको समाज को बाँटने वाली पार्टी कहते हैं तो भाजपा को क्या कहेंगे जो हर चुनावी मौसम में राम-मंदिर, हिंदुत्व आदि का राग अलापती है ? आम आदमी पार्टी कम से कम ऐसी हरकत तो नहीं करती !! आज के युवा को राम-मंदिर या बाबरी मस्जिद की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है ब्रज भाई...आज की युवशक्ति के मुद्दे भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, भूखमरी एवं राजनीति में वंशवाद तथा अपराधिकरण आदि हैं । और आप 'आम आदमी पार्टी' पर इतना बरस रहे हैं तो तनिक ये भी बता दीजिये कि भाजपा दिल्ली में अपनी सरकार बनाने से क्यों कतरा रही है ? आम आदमी पार्टी ने जिस काँग्रेस को उखाड़ फेंकने के लिए इतना संघर्ष किया, वो अब उसी से समर्थन कैसे ले सकती है ? आपने अपने लेख में जिस आँधी, तूफान की बात की है उससे पहले ज़रा ये भी सोच लेते कि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कर्नाटक, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश में मुँह की भी खाई थी । न तो उससे भाजपा ख़त्म हुई है और न ही इससे काँग्रेस ख़त्म होगी । राजनीति में हार-जीत तो लगी ही रहती है....बात सिर्फ सकारात्मक विचारधारा एवं अपने विचार रखने के तरीके की है ।  रही बात आपको मुख्यमंत्री बनाने की...तो आपकी अति आक्रामक एवं संकरी सोच को देखते हुए मुझे आपसे कोई खास उम्मीद नहीं है....माफ़ कीजिएगा !!

के द्वारा: चिंतक चिंतक

के द्वारा:

प्रिय श्री ब्रज किशोर जी, सादर नमस्कार. केजरीवाल की पोल खोल कर अपने अच्छा काम किया है. मैं भी अभी तक केजरीवाल का प्रशंसक रहा हूँ. जब से उन्होंने कहा है की वे सरकार बनाने में न तो किसी का समर्घन लेंगे और न तो किसी को समर्थन देंगे. उनको पता है की अतदाता नें खंडित जनादेश दिया है जिसका मतलब है क़ि एक मिली जुली सरकार बनायी जाए. .इसमें कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं हो सकती क्योंकि अभी हाल में ही मतदाता नें उसे अपदस्थ किया है. बचते हैं आप और भाजपा. जिन पर सरकार बनाने की ज़िम्मेदारी आती है. अगर केजरीवाल ऐसा स्टैंड लेते है की न तो किसी को समर्थन देंगे न समर्थन लेंगे तो सरकार कैसे बनेगी. क्या यह जनादेश की अवहेलना नहीं होगी. केजरीवाल को चाहिए या तो वे भाजपा को समर्थन देकर उसकी सरकार बनवाएं या उसका समर्थन लेकर स्वयं अपनी सरकार बनाएँ न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर आधारित मिली जुली सरकारें भी अच्छी चलती हैं. सरकार बनाने की ज़िम्मेदारी से भागना उचित नहीं कहा जा सकता.

के द्वारा:

जनता इसलिए हारी क्योंकि एक और समाज को बाँटनेवाला और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की गंदी राजनीति करनेवाला राजनीतिज्ञों की भीड़ में शामिल हो गया और सफलता भी पा गया। आप किस तरह उनकी गंदी राजनीति को साफ-सुथरी कह रहे हैं यह आप जानिए? यही बात तो मैं भी कह रहा हूँ कि नायक फिल्म में अनिल कपूर पर तालियाँ बजाना बहुत आसान है लेकिन उसको असली जीवन में सच करना बहुत मुश्किल। केजरीवाल ने यह तो बता दिया कि जनता को बरगलाया कैसे जाता है अब लगे हाथों वो यह भी बता दें कि शासन कैसे चलाया जाता है। उनको कांग्रेस मौका दे ही रही है 10 दिन शासन करके ही बता दें। मैं समझता हूँ कि 10 दिन कम नहीं होते अच्छे शासन की बानगी दिखाने के लिए। अगर वे तैयार नहीं हैं और जिम्मेदारी लेना नहीं चाहते तो उनको कहिए कि वो मुझे मुख्यमंत्री बनाएँ मैं बताता हूँ कि शासन कैसे किया जाता है।

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा:

आप का लेख अच्छा लगा.अरविन्द केजरीवाल के राजनीती में आने से रानीति में सुचिता आएगी या नहीं,ये तो अभी नहीं कहा जा सकता,परन्तु मेरे विचार से दिल्ली की जनता ने किसी एक पार्टी को बहुमत न देकर अपने लिए स्वयं मुसीबत मोल ले ली है.अब उसे दुबारा चुनाव का कष्ट झेलना पड़ेगा.जहाँ तक मोदी जी की बात है,वरतमान समय में देश को सँभालने के लिए मोदी जी बेहतर कोई नेता नहीं है.अरविन्द केजरीवाल त्रिशंकु विधानसभा बनवा के यदि खुश हो रहे हैं और किसी की सरकार नहीं बनने देना चाह रहे हैं तो दिल्ली की जनता को जल्द ही ये एहसास हो जायेगा कि आप पार्टी को वोट देकर उन्होंने भारी भूल की है.अब कुछ समय बाद दिल्ली में फिर चुनाव होंगे.बार बार चुनाव होने से बढ़ती महंगाई से लेकर अन्य तमाम कष्ट जनता को ही झेलना पड़ेगा.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

मित्र,चाहे आतंक हिन्दू फैलाएँ या मुसलमान आतंक आतंक होता है। दो-चार हिन्दुओं को पकड़ा जरूर गया है लेकिन उनपर अभी जुर्म साबित नहीं हुआ है और मैं समझता हूँ कि होगा भी नहीं क्योंकि यह कांग्रेस की हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश थी और कुछ नहीं। फिर भी अगर उनको सजा होती है तो जरूर दी जानी चाहिए क्योंकि आतंकी आतंकी होता है हिन्दू या मुसलमान नहीं। आप मानो या न मानो मुस्लिम आतंकवाद अगर 100 किलो आटा है तो हिन्दू आतंकवाद चुटकीभर नमक अगर वो है तो। फिर मुस्लिम आतंकवाद की जद में पूरी दुनिया है पूरी कायनात है। सच्चाई यह भी है कि मुस्लिम आतंक से दुनिया में सबसे ज्यादा मुसलमान ही मारे जा रहे हैं। आईएम भी पाकिस्तान से भारत में संचालित हो रहा है इसलिए भी जेहादी आतंक को हम सिर्फ भारत के संदर्भ में नहीं देख सकते। मुसलमानों को हिन्दुओं ने हमेशा भाई और हमवतन माना है दिक्कत तो सिर्फ उन मुसलमानों से हो रही है जो भारत को अपनी पुण्यभूमि नहीं मानते। दिक्कत मुस्लिम समाज से हो रही है जो उन मुसलमानों की सहायता करते हैं जो भारत को बर्बाद कर देना चाहते हैं। हम हिन्दुओं का तो हमेशा से सर्वे भवंतु सुखिनः और तु वसुधैव कुटुंबकम् में अटूट विश्वास रहा है। एक शॆर मैं भी आपकी खिदमत में पेश करना चाहता हूँ- वो रोज बम फोड़ते हैं तो कोई बात नहीं, हमने एक दीपक दिखाया तो बुरा मान गए।

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

आपकी साड़ी बातें एक तरफ़ा लग रही हैं मुझे वो ऐसे के आपही क़बूल भी करते हैं के आज मुसलमान अपने आतंकवादी बेटे से रिश्ता तोड़ कर साबित किया के आतंकवादी न तो मुसलमान होगा न तो किसी का बेटा होगा मुसलमान रोड पर भी निकल रहे हैं आतंकवाद के खिलाफ , और आप कहते हैं के मुसलमानो को गुजरात बॉम्बे अजमेर गोधरा ही सिर्फ नज़र आता है यानि के उसका कोई महत्त्व नहीं वहाँ जिन लोगों ने किया वो छोटी बात थी वो आतंवाद नहीं आप ये बता दें के आप प्रधान मंत्री बनते हैं आप मुख्यमंत्री बनते हैं साड़ी बड़ी ताक़त आपके पास है एक आतंकवाद पर २० मुस्लिम लोग फ़ौरन पकड़ लिए जाते हैं बाद में कुछ को मार पिट कर रिहा कर दिया जाता है के सबूत नहीं मिला करते १० लोग हैं और बदनाम पुरे भारत और दुनिया के मुसलमान होते हैं जिस तरह एक के वजह से सब बदनाम होते हैं तो जिन लोगों ने माले गांव गुजरात गोधरा अजमेर और भी जगहों पर ज़ुल्म किया उनमे से कितनो को पकड़ा गया और तब पुरे हिंदुस्तान के हिन्दू या दूसरे बदनाम कियूं नहीं होते कितने हिन्दू ने अपने मुजरिम खुनी बेटे कि लाश को लेने से इंकार किया या उनसे नाता तोडा नहीं किसी एक मुस्लमान को साबित कर दें के जुर्म साबित हो जाने पर उसे निर्दोष समझा गया सबसे पहले दुनिया का हर वो इंसान जो किसी भी एक मासूम जान का कातिल है इस्लाम अपने धर्म से उसे बाहर कर देता है मैं ने इतनी बात इस लिए लिखी के आपको समझ में आये वरना मैं यही समझता हूँ के जब तक जो इंसान इन्सान है वो अपने धर्म का पालन करने वाला है जिस दिन इंसानियत ख़त्म हो गया वो किसी भी धर्म का नहीं चाहे वो मुसलमान हो हिन्दू हो ईसाई हो या जिस धर्म से भी हो मैं दो चार मुजरिम के वजह से पुरे समाज को दोषी नहीं समझता क्या आपको पता है के आज भारत सबसे ज़यादह नक्सलियों से परीशान है कभी आपने नाम लिया उनमे कौन हैं वहाँ भी मुसलमान ही है क्या वो आतंकवाद नही या उसका नाम नक्सली ही काफी है क्या कर रही है आपकी सरकार आपने जो कुछ भी लिखा है वो एकतरफा लिखा है और आप जैसे लोगों के वजह से ही नफरत पैदा होती है आपने लिखा है के मुसलमान आतंकवाद पर चुप हैं और आरक्छन रिजर्वेशन मांगने का कोई हक़ नहीं आपने मुसलमान को भिकारी और दो नंबर का भारतवाशी समझा कैसे यही सब आपलोगों जैसे वाहियात बातों से आग पैदा होता है मुसलमान जब देश का नाम रौशन करता है तो आप कि आवाज़ बंद हो जाती है एक आतंकवादी पकड़ा जाता है तो सबको शक कि निगाह से देखते हो आखिर क्यूँ इस तरह कि सोच है आपकी जबके मुसलमान खुद एलान करता है के आतंकवादी मुसलमान हो ही नहीं सकता नेता अपनी परचार के लिए बड़े बड़े दंगा करवाते हैं के नहीं उनके पास पालतू गुंडे होते हैं के नहीं मुज़फ्फरनगर कि महापंचायत के बारे में क्या कहेंगे वहाँ पंचायत में लोग लाठी भाला लेकर आये थे आपकी सरकार क्या कर रही थी बाबरी मस्जिद का मामला अदालत में था और है आप ने जो किया वो अच्छा था आखिर आप कब तक मुसलमानो को क़बूल नहीं करेंगे क्यूँ एक नाम को बदनाम करेंगे आसाम कभी गए वहाँ का हाल सुना या टी वि पर देखा अरे मेरे दोस्त मुसलमान ही एक ऐसा जो हर ज़ुल्म व सितम बर्दाश्त करके भी अपने देश के लिए जान देने के लिए तैयार रहता है बात सीमा कि हो या अंदर कि और आतंकवाद से मुसलमान भी लड़ रहा है पाकिस्तान और दूसरे देशों में भी आतंकवादी हमले होते हैं आतंकवादी धर्म या ज़ात पर हमला नहीं करता वो इंसानियत पर करता है जहाँ सभी कि जाने जाती है इस लिए उसे मुसलमान नहीं कहते और आप भी मत कहना जिस तरह हम किसी एक के वजह से सबको बदनाम नहीं करते आप भी मेरी आदत सिख लो और सब मिल कर इसका मुक़ाबला करें प्रेम और मोहब्बत कि डोर में बांध जाओ सब भाग जायेंगे हम पहले एक और नेक हिंदुस्तानी हैं बाद में धर्म वाले हैं आपके लिए एक शेर है . वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता : हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम

के द्वारा: Imam Hussain Quadri Imam Hussain Quadri

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

मित्रवर आपके आदर्श पुरुष श्री श्री मोदी जी का व्यवहार बिलकुल वैसा ही है जैसा किसी बोझ तले हुए व्यक्ति का होता है ? आपने सही कहा चौबे जी छब्बे जी बनने चले थे बन के आये दूबे ( डूबे ) जी सवाल तो यह है की एक बार प्रधान मंत्री पद के काबिल घोषित होने के बाद उनके पाँव कुछ डगमगानाने लगे है हालत वैसे ही होने लगे है जैसे किसी व्यक्ति का ऊँठ गुम हो गया था बहुत ढूढने पर भी नहीं मिला तो पडोसी ने कहा की घड़े में ही देख तो - तो शायद अब हिन्दू हृदय सम्राट को जीत सुनिश्चित करने के लिए केवल अकेले हिन्दुओं पर भरोषा नहीं रहा है इसीलिए कभी मुसलमानों को जोड़ने के लिए अपने कर्मो पर पछतावा दर्शाने के लिए मारे गए लोगों की तुलना कुत्ते के पिल्लै से करते है और दूसरी और दलितों को लुभाने के लिए मंदिर से पहले शौचालय का बखान करने लगते है - इस लिए अपने अंदाज को बदलने का प्रयास कर रहे है शायद यह रास्ता अपने पूर्वर्ती के पीछे चलने का चुन ही लिया है -- सात्विक और स्पष्ट लेख के लिए बधाई ?

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मोदी जी को अपनी धर्मनिरपेक्षता को प्रमाणित करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे एक आम हिन्दू की तरह जन्मजात धर्मनिरपेक्ष हैं और जो भी जन्मना हिन्दू राजनेता धर्मनिरपेक्षता का ढोल पीटते रहते हैं दरअसल वे शर्मनिरपेक्ष हैं धर्मनिरपेक्ष तो वे हैं ही नहीं। वे तो अपने भ्रष्टाचरण को छिपाने और जेल जाने से बचने भर के लिए फैजी टोपी का दुरूपयोग करते रहे हैं। जहाँ तक सबका मत प्राप्त करने का प्रश्न है तो जिस तरह भारत की जनता वर्तमान काल में अल्पसंख्यकवादी व देशद्रोही राजनेताओं द्वारा विभिन्न हितसमूहों में बाँट दी गई है वैसे में किसी भी दल को सबका मत मिल पाना प्रायः असंभव ही है। बेहतरीन और सार्थक लेखन

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

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के द्वारा: Minakshi Singh Minakshi Singh

इस प्रकार हम पाते हैं कि जिन्ना घोर अवसरवादी थे और उनकी ही तरह उनके सपने भी अवसरवादी थे जो हमेशा रंग बदलते रहते थे। दरअसल जिन्ना एक हिन्दी फिल्म के पात्र अपरिचित की तरह विभाजित व्यक्तित्व की बीमारी से ग्रस्त थे। जिस कालखंड में नंदी हावी रहता वो शांति और सद्भाव की बातें करते और जब अपरिचित हावी हो जाता तो सिर्फ विध्वंस और बाँटने की। अपने जीवन के अंतिम काल में जिन्ना यह समझ चुके थे कि नए तरह के पाकिस्तान के निर्माण का जो सपना वे देख रहे हैं वह कभी पूरा नहीं होगा और पाकिस्तान भविष्य में एक मध्यकालीन इस्लामिक राष्ट्र बनकर रह जाएगा जिसकी बुनियाद होगी शरियत और कट्टरवाद। वह पाकिस्तान एक ऐसा पाकिस्तान होगा जहाँ चारों तरफ फिजाओं में सिर्फ और सिर्फ बारूद की गंध होगी और जमीन पर पड़ी होगी गोलियों से छलनी मलाला युसुफजई। हम सभी यह जानते हैं कि मरने के समय जिन्ना ने अपने डॉक्टर कर्नल इलाही बख्श से कहा था कि पाकिस्तान का निर्माण उनकी जिन्दगी की सबसे बड़ी गलती थी। काश,जिन्ना को अपनी इस सबसे बड़ी गलती का अहसास 24 मार्च,1940 से पहले हो गया होता! गलती का एहसास तो शायद जिन्ना को हुआ था लेकिन तब तक उसके हाथ से बात निकल चुकी थी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा:

राजाओं की तरह जिसके हजारों सेवक-सेविकाएँ हों और जो एकांत में किशोर-युवा लड़कियों के साथ कथित साधना करता हो वह कैसे संत या संन्यासी हो सकता है? सवाल यह भी उठता है कि आशाराम तो लगातार विवादों में घिरे रहे हैं। उन पर कभी जमीन हड़पने तो कभी तंत्र-साधना के दौरान मासूम बच्चों की बलि देने तो कभी किसी श्रद्धालु को लात मारने और गालियाँ देने के आरोप लगातार लगते रहे हैं। अब जबकि उनका सबसे विकृत और घिनौना रूप भी अनावृत हो गया है तब भी उनके करोड़ों कथित भक्तों की आँखें क्यों नहीं खुल रही हैं? धिक्कार है ऐसे अंधे भक्तों पर,धिक्कार है ऐसे धर्म पर भी जिसके करोड़ों अनुयायी ऐसे महामूर्ख हों,आदमी नहीं भेड़ हों। वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति कभी यहाँ भी पधारें

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

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के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

ब्रज किशोर जी, आपकी चिंता वाजिब है लेकिन जिस देश की सरकार बहरे लंगड़ों से चलाई जा रही हो, जहाँ अंधे धृतराष्ट्र अपने कुपुत्र दुर्योधन और दुशासन की बांह पकड़ कर आगे बढ़ रहा हो, जहां स्वयं हिन्दू हिन्दू कहने में शर्म महशूश कर रहे हों, उस देश में तो "अंधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर ह्त्या करदे तकाजा" ! हमारे सन्यासी, संत जो भगवा पहिनकर आम जनता में अपने महान बनने का स्वांग रचते है, कहाँ गए वे संत समागम करने वाले, गरीब किसानों की जमीन पर जबरदस्ती कब्जा जमा कर आश्रम बनाने वाले महात्मा, अभी तक इनमें से 'योग गुरु रामदेव " के अलावा किसी ने जवान खोलने की हिमाकत की है, नहीं ! कितने संत आश्रमों में अपनी छतरी ताने जनता को राम कृष्ण की कथा कहते हैं लेकिन अपने राम मंदिर कृष्ण मंदिर की दुर्दशा पर दो शब्द नहीं कह सकते ! कहाँ हैं अपने को जन सेवक कहने वाले जो ' बाबा अन्ना हजारे' की तरह दहाड़ मार कर इन दुष्ट गद्दी नसीन भ्रष्ट शासकों की नींद और चैन उडादे ! हमें इन संतों और अन्ना जैसे जन सेवकों के हाथ मजबूत करने होंगे उन जैसे दहाड़ मारनी होगी तब आम जनता जागेगी और देश की सड़ी गली सरकारें दम तोड़ेंगी !

के द्वारा: harirawat harirawat

ब्रिज किशोर सिंह जी, आपका पूरा लेख पढ़ा, और भी बहुत सारे बुद्ध जीवी लोग संविधान की चर्चा करते हैं, जनता को सर्वोपरि बताते हैं, सुप्रीम कोर्ट कार्य पालिका और विधायिका से ऊपर बताते हैं ! सुप्रीम कोर्ट सांसद और विधायकों को मंत्रियों को कही बार उनकी सीमाओं के बारे में संकेत भी दे चुके हैं लेकिन जिस देश में सता पर बैठे हुए निकम्मे, बहिरे, काणे ,लुटेरे, देश को ही लूट रहे हों अपने परिवार को ही फिर गद्दी सौंप रहे हों, उनके रास्तों में कोई भी रोड़ा अटकाएगा तो वे भला कैसे सहन करेंगे ! सर्वोच्च न्यायालय ने अभी निर्देश जारी किये थे की अफराधी सांसद और विधायक नहीं बन सकते न चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन इसका विरोध करने के लिए सारी पार्टियां एक हो गयी हैं, इसका तोड़ अब जनता के पास है, २०१४ के चुनाव में उन सारे प्रत्यासियों को वोट न दें जिनके खिलाफ कोर्टों में ह्त्या, किडनेपिंग, डकैती, भ्रष्टाचार, रिश्वत खोरी, रैप, उनके खिलाफ चल रही जांच में रोड़ा अटकाने वालों को बिलकुल नकार दें, चाहे वह किसी भी पार्टी का क्यों न हो ! उन सारे अफराधियों की जमानते जब्त करवा दें ! कोर्ट अपनी निगरानी में चुनाव तो करा ही सकती है, उन लोगों को जेल में डाल दें जो धन और बाहुबल से सता हथियाना चाहते हैं ! सटीक और अर्थ पूर्ण लेख के लिए साधुवाद ! हरेन्द्र जागते रहो !

के द्वारा: harirawat harirawat

वे चाहते तो बाद में दोबारा-तिबारा भी अमेरिका जा सकते थे। अब उनसे गलती तो हो ही चुकी है सो लोग चुप तो रहेंगे नहीं और कहनेवाले तो चाहें तो उनकी तुलना मजे में रोम के नीरो से कर सकते हैं और कह सकते हैं कि भाइयों एवं उनकी बहनों निराश मत होईए कि आप रोम के नीरो को नहीं देख सके। आप उसको आज भी देख सकते हैं। मिलिए इनसे ये हैं 21वीं सदी के जीवित नीरो,दुनिया के कथित रूप से सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के गृह मंत्री श्री श्री अनंत सुशील कुमार शिंदे। भूल जाईए नीरो को और उस कहावत को भी आज से एक नई कहावत ने उसका स्थान ले लिया है कभी कभी तो आदमी मंत्री बनता है , ऐसे में अमेरिका में घूमने का मौका क्यूँ छोड़ा जाए ? जिम्मेदारी तो बाद में भी निभा लेगा

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

मित्रों,हमारे कुछ मित्र अभी भी उन आदिवासियों को जो नक्सल आंदोलन में शामिल हैं भोला भाला और गुमराह कर दिया मानते हैं। मैं उनलोगों से पूछता हूँ कि परसों कांग्रेसी नेताओं की बेरहमी से हत्या करके लाशों पर नृत्य करनेवाला कैसे भोला-भाला हो सकता है? जब सुरक्षा बलों की गोलियाँ समाप्त हो गई थीं तब तो वे निहत्थे थे तो क्या निहत्थों पर बेरहमी से वार करने को मानवाधिकार का सम्मान कहा जाना चाहिए? क्या सिर्फ नक्सलियों का ही मानवाधिकार होता है? क्या यह फर्जी मुठभेड़ नहीं हुई? मैं दावे के साथ कहता हूँ कि न तो ये लोग भोले भाले हैं और न ही गुमराह बल्कि ये लोग असभ्य हैं,नरपिशाच हैं,ड्रैकुला हैं,हार्डकोर वधिक हैं इसलिए बातों से नहीं मानेंगे कभी नहीं मानेंगे। इनके लिए मनमोहन जैसा पिलपिला शासक नहीं चाहिए बल्कि राम जैसा अस्त्र-शस्त्रधारी चाहिए जो सिंहासन पर बैठते ही प्रतिज्ञा ले कि-निशिचरहीन करौं मही हथ उठाई पन किन्ह।सार्थक लेखन ! जब जब नेताओं पर आफत आती है तभी कुछ होता है

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय ब्रज भाई, सादर ! ""सरकारों को अगर देना ही है तो जनता को साईकिल के बदले अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे,लैपटॉप के बदले टॉप क्लास की फैकल्टी दे,पैसों और कम मूल्य पर अनाज के बदले स्थायी और गरिमापूर्ण रोजगार दे। हमें यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि वैशाखी चाहे सोने की ही क्यों न हो वैशाखी ही होती है और भीख का कटोरा चाहे रत्नजटित ही क्यों न हो भीख का कटोरा ही होता है। खैरात बाँटकर दस-बीस सालों तक देश पर राज जरूर किया जा सकता है,लूटा जरूर जा सकता है लेकिन देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था का सिरमौर नहीं बनाया जा सकता।""""""" बिलकुल सही बात है ! अधिकाँश योजनायें जनता के लिए नहीं, बल्कि उनके चहेतों की कमाई के लिए बनाई जा रही है ! स्वयं तो भ्रष्ट और मुफ्तखोर हैं ही, जनता को भी उसी राह पर ले जा रहे हैं !

के द्वारा: shashi bhushan shashi bhushan

त्रों,जहाँ तक सुशासन में पुलिस द्वारा जनता की की जा रही अमूल्य सेवाओं का प्रश्न है तो इससे तो हम इतने अभिभूत हैं कि सोंचकर ही हमारा दिल बैठा जा रहा है। पिछले सात सालों में हमारी सुशासनी सरकार ने बिहार पुलिस का चेहरा ही बदल कर रख दिया है। उसने पहले जिस तरह अहैतुकी कृपा करके शराब की दुकानों पर शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है लिखवा दिया था उसी तरह अब उसने राज्य के तमाम थानों पर आदर्श थाना लिखवा दिया है। माबदौलत (पगले आजम?) समझते हैं कि जब थाने का नाम ही आदर्श थाना होगा तो वहाँ पदस्थापित पुलिसकर्मी और अधिकारी खुद ही शर्म के मारे गलत काम नहीं करेंगे और इस प्रकार बिहार में स्वतः राम-राज्य कायम हो जाएगा। सही तस्वीर दिखाई है आपने श्री ब्रज किशोर सिंह जी

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

कश्मीर नाम की कुत्ते की दुम तब तक सीधी नहीं होने वाली है जब तक कि भारत के संविधान में धारा 370 मौजूद है और जब तक जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है। यह विशेष राज्य का दर्जा ही है जो वहाँ के मुसलमानों को भारत से अलग होने का अहसास देता है,हौसला देता है। केन्द्र में चाहे जिस पार्टी की भी सरकार हो। वो चाहे सईद को मुख्यमंत्री रखे या अब्दुल्ला को इससे तब तक कोई फर्क नहीं पड़नेवाला जब तक कि संविधान में यह आत्मघाती धारा मौजूद है। मुख्यमंत्री चाहे सईद हों या अब्दुल्ला सबने भारत सरकार को धोखा दिया है। उससे धन प्राप्त किया है और उसका दुरूपयोग किया है और आगे भी करते रहेंगे। उनका दिल भारत के लिए नहीं धड़कता सिर्फ कश्मीरी मुसलमानों के लिए धड़कता है, उनकी आँखें भारत के लिए नहीं बरसती सिर्फ कश्मीरी मुसलमानों के लिए बरसती हैं और बरसती रहेंगी। आप ही बताईए क्या आपने कल से अब तक किसी चैनल पर उमर अब्दुल्ला को सीआरपीएफ के जवानों की निर्मम और कायराना हत्या पर रोते हुए देखा है? जब तक देश मे ऐसे गद्दार रहेगे देश को लुटते रहेगे

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अरविन्द केजरीवाल हिन्दुस्तान में मिश्र और लीबिया की तरह खूनी क्रान्ति करके तख्ता पलट करना चाहता था- दारा सेना धर्म रक्षक श्री दारा सेना ने अरविन्द केजरीवाल द्वारा अन्ना को मारने की साजिश का अन्ना के सहयोगियों द्वारा किये गये खुलासे को सही बताया। दारा सेना ने इस खुलासे को करने पर इण्डिया न्यूज चैनल के प्रख्यात पत्रकार दीपक चैरसिया को बधाई दी है। दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने अपनी अन्ना टीम में छांट-छांट कर देश की आंतरिक सुरक्षा को सबसे बडा खतरा नक्सली ईसाई आतंकवादियों को भरा हुआ था। श्री मुकेश जैन ने कहा कि शातिर अन्ना ने जेल में जाने से पहले जारी भाषण में कहा था कि उनके आन्दोलन को अरविन्द केजरीवाल किरण वेदी प्रशान्त भूषण मनीष सिसोदिया अरविन्द गौड़ पी वी राजगोपाल शान्ति भूषण और अखिल गोगई नेतृत्व करेंगे। अखिल गोगई के बारे में असम सरकार के मुख्य मंत्री तरूण गोगई का कहना है कि यह उल्फा का कट्टर आतंकवादी हैं। मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह के अनुसार पी वी राजगोपाल नक्सली आतंकवादी हैं। श्री जैन ने आरोप लगाया कि 3 अप्रेल 11 को जैसे ही अंग्रेजो के ऐजेन्ट अग्निवेश को छत्तीसगढ़ सरकार ने कट्टर नक्सली आतंकवादी सबूतों के साथ बताया शतिर अन्ना तुरन्त.फुरन्त में 5 अप्रेल 11 को दिल्ली में जन्तर मन्तर पर अग्निवेश को अपने बगल में बैठाकर अनशन पर बैठ गया।ताकि अंग्रेजो के ऐजेन्ट अग्निवेश को गिरफतारी से बचाया जा सके। अरविन्द केजरीवाल द्वारा बनायी अन्ना टीम के खास कमान्डर नक्सली ईसाई आतंकवादियों के सरपरस्त अग्निवेश, प्रशान्त भूषण, अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया नक्सलियों के बर्बर आतंक पर खामोश रहते है । वास्तव में इनकी खामोशी इन देशद्रोहियों की बर्बर नक्सली इसाई आतंकवादियों को मौन स्वीकृति है। श्री मुकेश जैन ने खुलासा किया कि विदेशी ईसाई मिश्निरियां और नक्सली ईसाई आतंकवादियों द्वारा अपने सरपरस्त अरविन्द केजरीवाल की रहनुमाई में देश को फिर से अंग्रेजों का गुलाम बनाने की साजिश रची जा रही है। आज अंग्रेजी देशों की विदेशी ईसाई मिश्निरियां अपने पूर्वोत्तर के ईसाई आतंकवादियों द्वारा नागालैण्ड -मिजोरम- मेघालय को गुलाम बनाने में कामयाब हो गयी हैं। इन्ही के नक्सली ईसाई आतंकवादी हर दिन सैनिकों की हत्या करके भारत को फिर से अंग्रेजों का गुलाम बनाने की साजिश रच रहे हैं।इस घिनौनी खतरनाक साजिश को नक्सली व पूर्वोत्तर के ईसाई आतंकवादियों की खुल्ली समर्थक सी आई ए की ऐजेन्ट अरविन्द केजरीवाल की टीम और हथियार सप्लायर आतंकवादी रोमन कैथोलिक चर्च भरपूर मदद कर रहे हैं। श्री जैन ने अरविन्द केजरीवाल को तुरन्त गिरफतार करके सरकार से उसका नार्को टेस्ट कराने की मांग की । ताकि अन्ना को अनशन के बहाने जान से मारने की अरविन्द केजरीवाल की साजिश और उसके बाद नक्सली ईसाई आतंकवादी अन्ना टीम देश में किस प्रकार की हिन्सक वारदातों को अन्जाम देना चाहती थी, का खुलासा हो सके।

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खुर्शीद केवल गांधी-नेहरू परिवार के भक्त हैं। मैं शुरू से ही यह कहता आ रहा हूँ कि भारत के सारे मुसलमान भारत-विरोधी नहीं हैं जैसे कि भारत के सारे हिन्दू देशभक्त नहीं हैं। उदाहरण के लिए हमारे पूर्व वायुसेनाध्यक्ष श्री एसपी त्यागी भी हिन्दू ही हैं लेकिन वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में उनका कृत्य़ देशद्रोही वाला ही है। हमें भारत के सारे मुसलमानों को एक ही तराजू पर तौलने का प्रयास कतई नहीं करना चाहिए। हर धर्म और समाज में कुछ लोग अच्छे होते हैं तो कुछ बुरे भी। इसलिए हमें अपने जेनुअल अबीदीन जैसे देशवासियों पर गर्व करना चाहिए और उनके मातृभूमि-प्रेम को सलाम करना चाहिए। मैं अपने आसपास के तमाम आम मुसलमानों को देखता हूँ तो सारे-के-सारे जेनुअल अबीदीन की तरह के ही हैं। मैंने अपनी शादी में भी एक मुस्लिम बैंड को ही बुलाया था और मुझे आज भी वो लम्हा याद है कि ओम जय जगदीश हरे की धुन को उनलोगों ने कितनी भक्ति से बजाया था। श्री ब्रज किशोर सिंह जी , ये सही बात है की खुर्शीद और अन्य कांग्रेसी गाँधी परिवार के भक्त ज्यादा हैं लेकिन सिर्फ एक विषय को लेकर आप अबिदीन को देश भक्त और खुर्शीद को देश द्रोही नहीं कह सकते ! खुर्शीद एक मंत्री है और उन्हें अपनी जिम्मेदारी को भी निभाना होता है !

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मैं समझता हूँ कि इस तरह के लेखक यह भूल रहे हैं कि उनका लेखन बहुत-कुछ मसाला फिल्मों के समान है जो तत्काल सुपरहिट भले ही हो जाएँ दीर्घकाल तक याद नहीं की जातीं। कहना न होगा कि हमारे कई ब्लॉगरों की रचनाएँ इतनी अश्लील होती हैं जितनी शायद फुटपाथ पर बिकनेवाली अश्लील डाइजेस्ट भी नहीं होता होगा। अंत में मैं सभी ब्लॉगर-बंधुओं से करबद्ध प्रार्थना करता हूँ कि वे जो भी लिखें समाजोपयोगी लिखें,देश और विश्व के कल्याण के लिए लिखें क्योंकि इसी में आपका भी कल्याण निहित है। ईश्वर ने आपको समुचित सुविधाएँ और माहौल देकर इसलिए ज्ञानी और विद्वान नहीं बनाया कि आप उसका सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए दुरूपयोग करें। याद रखिए समाज तो जानबूझकर पथभ्रष्ट करना या उसमें फूट डालना एक आपराधिक कृत्य है और यह भी याद रखिए कि आप चाहे आस्तिक हों या नास्तिक आप कर्मफल के सार्वकालिक और सार्वदेशिक सिद्धांत से हमेशा बंधे हुए हैं।इस संदर्भ में मेरी शत प्रतिशत सहमति आपसे.ये एक ऐसा मंच है जिसके माध्यम से हम सार्थक सन्देश भी दे सकते हैं,अपनी प्रतिभा को भी निखार सकते हैं और स्वस्थ मनोरंजन भी प्रदान कर सकते हैं,सुन्दर सन्देश के लिए आभार.बहुत सुन्दर शब्दों में आपने एक सही विषय को विस्तार दिया है ! ब्लोगार की आज के समय में भूमिका अपनी अहमियत रखती है ! बहुत सही आलेख आदरणीय श्री ब्रज किशोर सिंह जी !

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मैंने भी यह एग्जाम दिया था। इसमें आयोग ने 150 प्रश्न पूछे जिनमे से 116 प्रश्न गलत थे,बाद में आयोग ने 13 प्रश्नों में सुधर किया जिसमे से 9 के उत्तर को बदला गया और 4 प्रश्न को रद्द (delete ) कर दिया गया। यहाँ तक तो सब कुछ ठीक ही नजर आता है लेकिन जहाँ तक मैंने अपने अनुभव से समझा है,आयोग जान बुझ कर प्रश्नों को गलत करता है ताकि सुधार के नाम पर वो अपना हित साध सके। इस परीक्षा में मैंने 139 प्रश्नों को हल किया था। इस परीक्षा में पहली बार BSSC द्वारा 28 -1 -2013 को निर्गत मॉडल उत्तर के अनुसार मेरा 109 उत्तर सही और 30 उत्तर गलत था ।इस प्रकार मेरा प्राप्तांक (109 x 4 - 30 =) 406 था । पुनः BSSC के एक्सपर्ट कमेटी की अनुशंसा के आलोक में 13 प्रश्नों में सुधार किया गया, जिसके अनुसार 9 प्रश्नों के उत्तर को सुधारा गया और 4 प्रश्नों को रद्द (delete)किया गया । इस परिवर्तित मॉडल उत्तर के पश्चात मेरे उत्तर पत्रक का 116 प्रश्न सही, २० प्रश्न गलत और 3 प्रश्न रद्द (delete) था । इस प्रकार 146 प्रश्नों में मेरे 116 सही उत्तर और 20 गलत उत्तर के नियमानुकुल मूल्यांकन के उपरांत मेरा 444 अंक(116 x 4 -20 =444) होना चाहिए था, जबकि मेरे उत्तर पत्रक में सुधार न करके मुझे पुराने मॉडल उत्तर के आधार पर 406 अंक ही दिया गया है,जिसके परिणाम स्वरुप मै काउंसलिंग से भी बंचित हूँ ।(general catogery के लिये cutoff 422 घोषित किया गया ) इसप्रकार इस समूचे प्रकरण से मैंने यही निष्कर्ष निकाला है की आयोग जान बुझ कर इस तरह की भूल और नादानी करता है । इसलिये उसने अभी तक न तो किसी का अंक दिया था न ही सभी प्रश्नों और उनके उत्तर को अपने साईट पर अपलोड किया ।वो तो भला हो AISF बालो का की उन्होंने दवाब बना कर २५-२-२०१३ को सबका मार्क्स जरी करबाया जिससे मेरे जैसे नादान लॊग भी आयोग की चालाकीं को समझ पाये ।आयोग ने प्राम्भिक परीक्षा में भी यही किया था,उसने 3 प्रश्नों के सुधार के नाम पर 11000 से अधिक फेल कैंडिडेट्स को बैकडोर से घुसाया था । ५-६ दिन पहले मैंने मैंने t .v. नितीश जी का बिधानसभा से भाषण सुना था,जिसमे वो कह रहे थे कि बिहार में उनके द्वारा बहाल टीचर्स पूरी तरह से नाकारा है उनको ये तक नहीं पता है कि राम खाता है होगा कि राम खाती है होगा,इस कारण उनकी मांग पूरी तरह से नाजायज है । सच ही हममे उनके सेटिंगबाज़ ऑफिसरॊ और दलालों जैसे बुद्धि कहा है,हमारे जैसे नादान लॊग तो अपनी मेहनत के बल पर अपनी स्थिति को सुधारना चाहते है और ऐसा सोचना तो बिहार में शायद पाप ही है...................

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शशि जी फिलहाल तो नागर जी ने मेरा ही बहिष्कार कर दिया है यह ई मेल भिजवाकर-We are taking back your auto publish right Inbox Add star Pooja Prasad 24 February 2013 09:54 To: "brajvaishali@gmail.com" Cc: Nirendra Nagar , Vivek Kumar , "Team.Nbt" Reply | Reply to all | Forward | Print | Delete | Show original नमस्कार ब्रजकिशोर जी एनबीटी रीडर्स ब्लॉग में आपने अपने ब्लॉग के मार्फत आज सुबह (24 फरवरी 2013) एक पोस्ट लाइव की है: कहीं नीरेंद्र नागर भी *डाधिपति तो नहीं हैं? हम आपकी यह पोस्ट न सिर्फ डिलीट कर रहे हैं ब्लकि आपसे ऑटो पब्लिश राइट भी वापस ले रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि एनबीटी रीडर्स ब्लॉग के माध्यम से हम किसी भी ब्लॉगर को किसी भी व्यक्ति पर पर्सनल कॉमेंट करने का अधिकार नहीं देते। इस मेल के जरिए हम आपको यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यदि यह पोस्ट एनबीटी ऑनलाइन के संपादक पर निजी टिप्पणी न होकर किसी और व्यक्ति पर भी इसी अंदाज में लिखी गई होती, तब भी यही फैसला लिया जाता। उम्मीद है, अब आप पोस्ट करते समय तनिक सतर्क और जिम्मेदार रहेंगे। रीडर्स ब्लॉग विचारों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण और डिग्निफाइड प्लैटफॉर्म है। कृपया इसका मिसयूज न करें। शुक्रिया टीम एनबीटी

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इन परिस्थितियों में अन्ना को अगर फिर से जनता का विश्वास जीतना है तो पहले तो उनको अपनी टीम में ऐसे लोगों को ही शामिल करना होगा जो उनके परम-पावन उद्देश्यों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हों,अटूट निष्ठा रखते हों। यह कतई आवश्यक नहीं कि टीम में कोई प्रसिद्ध व्यक्तित्व उपस्थित रहे ही। बल्कि सेलिब्रिटी को टीम में शामिल करने के अपने खतरे हैं जैसा कि पहले अरविन्द केजरीवाल के मामले में देखा गया और अब किरण बेदी के समझौतावादी बयान के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। बल्कि टीम अन्ना में आने पर कोई भी अनजाना व्यक्ति भी जल्दी ही प्रसिद्ध हो जाएगा इसमें संदेह नहीं। कुछ वास्तविक कारणों की तरफ इंगित किया है आपने श्री ब्रज किशोर सिंह जी !

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हमारे महान मूर्खिस्तान के पास बहुत-बड़ी सेना है। हमारे सैनिकों को सिर कटवाने की पूरी छूट दी गई है लेकिन उनको पड़ोसी नापाकिस्तान के सैनिकों को खरोंच तक लगाने की मनाही है। हमारे देश पर बार-बार हमारे पड़ोसी नापाकिस्तान और चील आतंकी हमले करते रहते हैं,उनके सैनिक हमारी सीमा में घुसते रहते हैं लेकिन हम कभी बुरा नहीं मानते बल्कि हमारे यहाँ इन घुसपैठियों का कांग्लादेशी घुसपैठियों की तरह अतिथि-सत्कार किया जाता है। वो कहते हैं न कि अतिथि देवो भव। हमने गलती से अपने एक अतिथि कसाबू को फाँसी पर लटका दिया था और तभी से 21 नवंबर को उस महान कसाबू जी (हमारी दूर-दूर तक आपके हिन्दुस्तान के महानतम नेताओं दिग्विजय सिंह या सुशील कुमारे शिंदे से कोई रिश्तेदारी नहीं है) की अतिमहान आत्मा की याद में हमारे यहाँ राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया जाता है। मैंने दिल और दिमाग का उपयोग बिलकुल नहीं किया श्री ब्रज किशोर सिंह जी किन्तु मन फिर भी रह रह कर इन्हें कोस रहा है की हमारे वीर स्वतन्त्रता सेनानियों ने क्या ऐसे ही उल्लू के पट्ठों के लिए देश को आज़ाद कराया था और अपनी आहुति दी थी !

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आदरणीय श्री ब्रज किशोर सिंह जी , सादर ! बुरा मत मानियेगा लेकिन अब टाक मैंने आपकी जितनी पोस्ट पढ़ी हैं , सबसे बेहतर ये लगती है ! दिल को छू लेने वाली कहानी से शुरू करके आपने घमंडी तपस्वी तक की जो बात लिखी है वो कहीं न कहीं ये दिखाती है की हम न अब उस धरती के वासी रहे हैं जिसे अमेरिका का कोई दंपत्ति आकर सलाम करे और न ही वो पुत्र जिसमें श्रवण कुमार दिखाई दे ! ये एक मात्र उदहारण है जगदीश माली का या अंतरा माली का ! ऐसे कई जगदीश और ऐसी कई अंतरा महानगरों की चकाचोंध में मिल जायेंगे ! लेकिन एक बात फिर भी कहूँगा की ये महामारी "इंडिया " में ज्यादा है भारत में है लेकिन निम्न स्टार पर है ! बहुत सार्थक लेखन ! सलूट

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सर्वप्रथम तो आपकी सुन्दर भावनाओं और संस्कारों के लिए आप बधाई के पात्र हैं.आपने सही कहा है आज भागदौड की जिंदगी में सब इतने व्यस्त हैं कि किसी के पास किसी के लिए समय नहीं बस समय है तो दिखावे अपनी मौज मस्ती के लिए. मेरा मानना है कि अंतर सबकी सोच में आया है जीवन शैली बदल रही है,बड़े शहरों में जहाँ बच्चे नौकरी करते हैं,उनकी व्यस्त जिंदगी,छोटे घरों में पहले जैसा जीवन संभव नहीं .परन्तु सेवा भावना है तो सब रस्ते निकल आते हैं,हाँ उस जीवन में बड़ी पीढ़ी को भी समायोजन करना ही पडेगा,जिसके लिए वो तैयार नहीं होते .अतः थोड़ी सोच में बदलाव तो जरूरी है.मैंने इस संदर्भ में एक लेख लिखा था यदि संभव हो और समय हो तो कृपया पढकर बताएं .लिंक दे रही हूँ http://nishamittal.jagranjunction.com/2011/07/24/चार-कदम-हम-चलें-तो-दो-आप-भी/

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नाबालिग रेपिस्ट का इन्साफ हम करेंगे। तीन-तीन बेटियों का बाप होने की दुहाई देनेवाले मनमोहन सिंह और सुशील कुमार शिंदे से मैं पूछना चाहता हूँ कि अगर दामिनी उनकी बेटी होती (हालाँकि ऐसा होना नितान्त असंभव है क्योंकि इनकी बेटियाँ तो हमेशा जेड प्लस सुरक्षा में रहती हैं) तब भी क्या सरकार का रवैया इसी तरह उदासीन रहता? क्यों नहीं बुलाया जा रहा है संसद का विशेष सत्र? क्या जरूरत थी विधि आयोग के अस्तित्व में रहने पर भी एक और आयोग बनाने की? ऐसे कितने आयोगों या समितियों की सिफारिशों को सरकार ने लागू किया है? क्या सरकार ने सिर्फ टालने की सोंचकर ऐसा नहीं किया है? मैं पूछता हूँ कि कानून आयोग बनाएगा या संसद बनाएगी? फिर आयोग बनाने जैसे विलंबकारी कदम उठाकर क्यों जनता के धैर्य की सरकार परीक्षा ले रही है? पिछले कई सप्ताहों से अनशन पर बैठे जागरूक युवाओं में से कोई अगर मर जाता है तो उसकी मौत के लिए जिम्मेदार कौन होगा,सोनिया गांधी का चमचा मनमोहन सिंह या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह या कई बेटियों का बाप मनमोहन सिंह? इसलिए वक्त की नजाकत को समझते हुए सरकार को तुरन्त संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए और बलात्कारियों को फाँसी की सजा का प्रावधान करना चाहिए। आपको लगता है सरकार इस में कड़े कदम उठा पायेगी और कोई कठोर कानून ल सकेगी ? नहीं ! क्यूंकि उस स्थति में इनके अपने लोग भी फस जायेंगे ! इसी क्रम में आपने जी संगीता अवस्थी की कविता दी है , सार्थक लगती है !

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कहाँ मेरे राम मर्यादापुरूषोत्तम और कहाँ यह राम सिंह? यह मेरे राम का अपमान है,घोर अपमान और मैं इसे कदापि सहन नहीं कर सकता। इस नीच का जिसने भी नामकरण किया था उसने मेरे राम को अपमानित करने की धृष्टता का अक्ष्म्य अपराध किया है। क्या मेरे राम ने कभी किसी पर-स्त्री की तरफ बुरी नजरों से निमिष मात्र के लिए देखा था? बल्कि मेरे राम ने तो बलात्कार-पीड़िता अहिल्या को जो लोक-लाज के मारे पत्थर सी,निर्जीव-सी हो गई थी समाज में पुनर्प्रवेश दिलाया था और ऐसा करके भारतीय समाज को संदेश दिया था कि नफरत बलात्कारी से करो न कि उससे जिसने इस अमानुषिक अत्याचार को भोगा है। नाम एक सा होने से संस्कार और मन वैसा ही हो , ये जरुरी नहीं ! और इस बात को आपने बखूबी अपने लेखन में लिखा है ! सही पोस्ट

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आज जबकि रह-रहकर बलात्कार की दिलो-दिमाग को हिला देनेवाली घटनाएँ सामने आने लगी हैं तो हम अपने दिमाग के कार्बुरेटर में आ गए कचरे को साफ करने की बात नहीं कर रहे और सतही या बाहरी उपाय करने में लगे हैं। हम बसों के शीशों का रंग बदलने की बात कर रहे हैं और बसों से पर्दा हटाने का आदेश दे रहे हैं। हम अति हास्यास्पद तरीके से कभी बलात्कारियों को फाँसी देने की मांग कर रहे हैं तो कभी रात में चलनेवाले बसों में बल्ब जलाए रखने का निर्देश दे रहे हैं। मैं पूछता हूँ कि ऐसे तुगलकी आदेशों का अक्षरशः पालन करवाएगा कौन? मैं पूछता हूँ कि क्या वर्तमान भारत में सिर्फ बसों में ही बलात्कार किए जा रहे हैं? अगर कोई बाप अपनी बेटी या कोई भाई अपने बहन की अस्मत पर खुद ही हाथ डालता है तो क्या उसे हमारी कोई भी सरकार या कानून रोक सकता है? क्यों आज हमारी बहनों को सबसे ज्यादा खतरा खुद के घर में ही है? क्यों जनता की जान-माल और अस्मत की रक्षा के लिए बनाए गए थानों में ही सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएँ होती हैं? क्या इन सवाल पर कभी हमारे सिरफिरे राजनेताओं और नीति-नियंताओं ने विचार किया है? क्या उन्होंने कभी गंभीरतापूर्वक विचार किया है कि क्यों आज का औसत भारतीय ईन्सान से जानवर बनता जा रहा है और इस नैतिक गिरावट को कैसे रोका जा सकता है? क्या उनके दिमाग ने कभी इस बात पर चिन्तन किया है कि ऐसे क्या उपाय किए जाने चाहिए जिससे ईन्सान के बच्चे और बकरी के बच्चे के बीच का अंतर पुनर्स्थापित हो सके? बहुत सटीक एवं सर्तक लेखन ! किसी ने कहा इस मंच पर की हमारे संस्कार भी इस मामले में अहम् भूमिका अदा करते हैं ! सहमत हूँ

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आदरणीय बृज किशोर सिंह जी, वर्तमान में नैतिक-सांस्कृतिक अधोपतन और जनाक्रोश पर अत्यंत विचारणीय प्रश्नों सहित, पठनीय प्रस्तुति, हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! " मैं सोंचता था कि क्या भविष्य में विश्वगुरू भारत में भी शरीर और सेक्स-संतुष्टि का महत्त्व इतना ज्यादा हो जाएगा कि सारे रिश्तों की गरिमा तार-तार कर दी जाएंगी? दुर्भाग्यवश वह समय बहुत जल्दी और मेरे अनुमान के विपरीत मेरी जिन्दगी में ही आ गया है। आज जब भी मैं समाचार-पत्रों में पढ़ता हूँ कि गुरू ने शिष्या का यौन-शोषण या बलात्कार किया,आज जब भी किसी पिता की खुद अपनी ही बेटी के प्रति हैवानियत की खबरें देखता या पढ़ता हूँ तो मुझे वह बचपनवाला बकरी का बच्चा याद आ जाता है। आखिर क्यों हुआ ऐसा और हुआ भी तो इतनी तेजी से क्यों हुआ? क्यों इतनी जल्दी हम भारतीयों की ईन्सानियत मर गई? ज्यादा नहीं पचास साल पहले का भारत तो बिल्कुल भी ऐसा नहीं था।"

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मित्र आप तो अपना आपा ही खो बैठे। मित्र जैसा कि आपने भी कहा है कि मैंने उक्त पंक्ति में लगभग का प्रयोग किया है अर्थात् ऐसा हो ही जाए कोई जरूरी नहीं है लेकिन जैसा कि इस समय के ट्रेण्ड से पता चलता है यह सोलह आने सच है कि अगर अधिकारी या कर्मचारी दलित हुआ तो सूचनार्थी पर झूठे मुकदमे ठोके जाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस मामले में तो पुलिस ने भी लापरवाही की है और बिना आरोपी से स्पष्टीकरण लिए ही अनुसंधान को कथित रूप से पूरा भी कर लिया है। जहाँ तक उक्त अधिकारी को पता चलने का प्रश्न है तो यह काम आप ही कर दीजिए मैं जो मुझे सच लगेगा वही लिखूंगा चाहे मुझे इसके लिए फाँसी पर ही क्यों न चढ़ना पड़े जेल तो बहुत छोटी सी बात है।

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कहना न होगा कि न्याय-व्यवस्था के ध्वस्त हो जाने के चलते हमारे देश में आज जिसकी लाठी उसकी भैंस की कहावत ने मूर्त रूप ग्रहण कर लिया है। न्याय किसको चाहिए होता है?उसको जो धर्म पर चलता है अथवा कमजोर होता है। जब न्याय नहीं मिलने की उल्टी गारंटी हो तो कोई क्यों धर्म पर चलेगा या क्यों कोर्ट में जाएगा? फैसला ऑन द स्पॉट खुद ही क्यों नहीं कर लेगा? आज सज्जन लोग भी कानून को अपने हाथों में ले रहे हैं तो इसके लिए दोषी कौन है? क्या इसके लिए दोषी खुद कानून ही नहीं है? आपने बहुत विश्लेषण करके , उदाहरन देते हुए इस लेख को प्रस्तुत किया है श्री ब्रज किशोर सिंह जी ! आपकी मेहनत, आपकी जानकारी और लेखन प्रतिभा को सलाम !

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के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

मित्र सत्य कड़वा तो होता है ही कभी-2 अश्लील भी होता है। मुझे तो यह भी लगता है कि आप दिमाग के साथ-2 आँखों से भी अंधे है। शीर्षक के बारे में मैं स्पष्टीकरण दे चुका हूँ जो शायद आपको नजर ही नहीं आया। जो सरकार अपने सैनिकों के अपंग होने के बाद उनको मरने के लिए छोड़ दे उसको कोई कैसे शाबासी दे सकता है? सरकार का जो व्यवहार 26-11 के जिंदा शहीदों के साथ है क्या वह वैसा ही नहीं है जैसा कि हम कंडोम के साथ करते हैं यूज किया और फेंक दिया? हम या हमारे राज्य के लोगों की बनाई यह सरकार नहीं है कि आप कह रहे हैं कि हमने ही उसे जिताया है। मैं दावे के साथ कहता हूँ कि इस बार कांग्रेस का बिहार में खाता भी नहीं खुलेगा पिछली बार तो 2 लोग जीत भी गए थे।

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क्या वह भी श्रीलंका की कथित धर्मनिरपेक्ष सरकार की तरह यह चाहती है कि श्रीलंका में सनातन धर्म का कोई नामलेवा ही नहीं रहे? क्या उस स्थिति में हम भारतीय हिंदू भी मूकदर्शक बने रहेंगे और शांतिपूर्वक कांग्रेस को ही वोट देते रहेंगे? क्या हमारे ऐसा करने से हमारा हिंदू धर्म मजबूत होगा या देश मजबूत होगा? माना कि हम हिंदुओं ने कभी तलवार के बल पर अपने धर्म का विस्तार करना नहीं चाहा लेकिन जब कोई दूसरा धर्म हमारे धर्म को तलवार के बल पर जड़-मूल से ही समाप्त कर देने की कोशिश करे तब भी तलवार तो क्या जुबानी आवाज तक नहीं उठाना क्या हमारी वीरता का परिचायक है या होगा? इस सब के बावजूद हमारे देश का प्रधानमंत्री और मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री उस श्रीलंका के राष्ट्रपति को अपना मेहमान बनाते हैं ! सार्थक और ज्ञानवर्धक लेख ! न जाने क्यूँ भारत सहित हिन्दुओं की दशा , हर जगह एक सी ही लगती है -बेचारा सा लगता है !

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प्रिय ब्रज किशोर जी, नमस्कार. ठाकरे जी के सन्दर्भ में जो बाते आपने लिखी है उसमे मै इस सन्दर्भ में आपसे इत्तेफाक नहीं रखता हूँ . की जो मंदिर मस्जिद तोड़ देता है वो सम्प्रदईकता नहीं होती है. एक तरफ तो हम कहते है की हमारा देश धर्म को बहुत महत्व देता है और सभी समुदाय के धर्मो का आदर करता है. तो ये कौन सी आदर है जो ठाकरेजी और आदवानिजी जैसे नेतावो ने मुस्लिम समुदाय के साथ किया और कोई कुछ नहीं कर सका और हमारा क़ानून भी आजतक उन्हें सजा नहीं दिला सका हालाकि ठाकरेजी नहीं रहे भगवन उनके आत्मा को शांति दे लेकिन और लोग तो अभी जीवित है तो सरकार उनके खिलाफ कोई कदम क्यों नहीं उठाती है जो आज भी हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा बने हुए है. आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा |

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जब राष्ट्रपति के पद के लिए चुनाव हो रहा था। तब बाल ठाकरे ने योग्य और ईमानदार भैरों सिंह शेखावत को छोड़कर भ्रष्ट और अयोग्य प्रतिभा पाटिल का सिर्फ इसलिए समर्थन किया था क्योंकि वह मराठी थीं। बाल ठाकरे ने मराठी और गैरमराठी को मुद्दा बनाकर और उसके बल पर अप्रत्याशित सफलता प्राप्त करके देश का ऐसे कर्महीन राजनीतिज्ञों को जो जाति और धर्म के नाम पर पहले से ही जनता को बाँटकर सत्तासुख भोग रहे थे श्री ब्रज किशोर सिंह जी , मैं आपके लेख पढता रहा हूँ और जैसा अनुभव किया है वैसा प्रतिउत्तर भी लिखा है ! आज आपकी बात से असहमत सा हूँ ! आपकी बहुत सी बातें मानी जा सकती हैं लेकिन इस बात को दिल स्वीकार नहीं करता की बाल ठाकरे देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा थे ! मैं न तो उनका विरोधी रहा हूँ और न ही उनका समर्थक , मैं मानता हूँ की उन्होंने जो किया वो उनकी मानसिक संकीर्णता या marathi मानुष के लिए प्रेम हो सकता है लेकिन उनके इस प्रेम को खतरा नहीं कह सकते !

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प्रिय ब्रिज किशोर सिंह जी लगता है कि आपभी पूर्वाग्रहों से ग्रसित होकर ऐसा कह रहे है और यह स्वाभाविक भी है क्योंकि आज भ्रष्टाचार के मामलों का इतना खुलासा हो रहा है कि न जाने कितने ही घोटाले और घपले जनता कि नजरों के सामने आते ही नहीं और आ भी जायं तो जनता उनसे क्या नतीजे निकालेगी ? मौजूदा कैग या आगे आने वाले कैग भी केवल और केवल सरकारी नौकर शाह ही होगा - और यह इस क्षेत्र के लोगों कि काम करने लो की पद्धति होती है कि किसी भी धन सम्बन्धी काम काज के लिए उसका आडिट करना यही काम करते भी है लेकिन जब अनुमान के द्वारा आकलन किया जाता है तो यही सब कुछ होगा और आगे भी होता रहेगा ? मैं एक सवाल आपसे ही करना चाहता हूँ कि पुरे देश में कैग कि शाखाओं का जाल है सरकार के सारे कार्यालयों का आडिट होता है फिर भी साल दर साल ये घपले क्यों नहीं रुकते ?

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प्रश्न उठता है कि नवीन घटनाक्रमों के परिप्रेक्ष्य में क्या आंग सान को लोकतंत्र का सच्चा सिपाही,सच्चा पुजारी या सच्चा पैरोकार कहा जा सकता है? जिस तरह से उन्होंने सुनियोजित तरीके से उनके देश में रोहिंग्या मुसलमानों के बौद्ध बहुसंख्यकों द्वारा किए जा रहे नरसंहार के प्रति तटस्थ-भाव प्रदर्शित किया है वह किसी भी तरह महान लोकतंत्रवादी के रूप में उनके यश के अनुरूप है? यह तो वही बात हुई कि हम बर्मा में लोकतंत्र तो चाहते हैं लेकिन ऐसा लोकतंत्र चाहते हैं जिसमें सिर्फ बहुसंख्यक बौद्धों के लिए स्थान हो और अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों को उस लोकतंत्र में दोयम दर्जे का नागरिक बनकर भी जीने का अधिकार नहीं हो। क्या इस तरह के दूषित और नाजीवादी लोकतंत्र के लिए किया है आंग सान ने 20 सालों तक संघर्ष? ब्रजकिशोर जी.... तीखी परंतु सटीक टिप्पणी.....

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बेहतर होता कि केंद्र सरकार 2जी स्पेक्ट्रम की निराशाजनक नीलामी के लिए सारा दोष कैग के मत्थे मढ़ने के बजाय इस पर विचार करती कि उससे कहाँ-कहाँ गलती हुई और भविष्य में किस प्रकार इस तरह की गलती से बचा जा सकता है? ऐसा आत्मचिंतन इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि नीलामी की विफलता इस बात का संकेत है कि जिस दूरसंचार क्षेत्र को अब तक भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति का आधार माना जा रहा था उसमें भी अब निराशा का वातावरण बनने लगा है। ब्रजकिशोरजी... निश्चित तौर पर सरकार का काम यह नहीं है कि वह अपने बचाव के रास्ते तलाशे बल्कि उसका काम यह होना चाहिए उसे इस तरह के प्रयासों की जरूरत न पड़े और वह सरकार के उत्तरदायित्वों को निभाए....

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आपने सही कहा कि सत्ता को शोषण करना होता है इसलिए वह जनता को हमेशा भुलावे में रखती है। बिहार में अलगाववादी आंदोलन संभव नहीं है यह नीतीश को भी समझ लेना चाहिए। उनको जनता ने जो काम सौंपा था सुशासन स्थापित करने का वह तो वे कर नहीं सके और राज्य आज फिर से जंगलराज के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है और जनाब अपनी अकर्मण्यता का ठीकरा केंद्र पर फोड़ रहे हैं। जब वे केंद्र में मंत्री थे तब क्यों नहीं दे दिया था बिहार को विशेष राज्य का दर्जा? जनाब जनता को तो धोखे में रख ही रहे हैं अपने सहयोगी भाजपा को भी धोखा देने की बात सार्वजनिक रूप से कर रहे हैं कल की अधिकार रैली में भी की। कहीं इस आदमी के पेट में सचमुच दाँत तो नहीं है?

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नितिश की अधिकार यात्रा रंग दिखा रही है । अब मैं लिखता हुं वो मेरे विचार है मानना जरूरी नही । कुछ महिने पिछे जाते हैं तो राज ठाकरे और बिहार की जनता के विवाद में बिहार जी जनता बिगबोस की नजरमें आ गई । ये दबंग प्रजा है, और भोली भी । अच्छे रास्ते पे चली तो अच्छा कर के दिखायेगी और बूरे रास्ते पे ले जाओ तो देश का बंटाधार करेगी । बिगबोस कभी भारत का अच्छ नही सोचता उसे तो शोषण करना होता है भारत की जनता का । नितिश को साध लिया है । आज उस की यात्रा में "बिहारी पन" के नारे सुने । भारत को भूल जाओ । बिहार बिहार बिहार ! बिहारी जनता को सिर्फ बंदुक थमाना बाकी रख्खा । बिहार को भारत से अलग करने की साजिश । बिगबोस की प्यारी नीति अलगाववाद । अब दूसरा खालिस्तान बनते देर नही लगेगी ।

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किसी का जीवन बर्बाद हो गया और वे इसे मामूली अनियमितता का नाम दे रहे हैं उनकी मासूमियत पर तो मैं तो बलिहारी जाऊँ। सिर्फ समस्तीपुर जिले में कई हजार महिलाओं का गर्भाशय गायब है और सरकार इसे इक्का-दुक्का बता रही है। इन मंत्रियों की बहू-बेटियों के साथ ऐसा होता तब इनको इसकी भयावहता का पता चलता। बिहार सरकार ने इसकी जाँच करवाई है क्या? अगर नहीं तो क्यों नहीं करवाया? क्या इसकी लीपापोती नहीं हो रही है? जो काम घोटालों के मामले केंद्र सरकार कर रहीं है वही काम इस मामले में बिहार सरकार कर रही है। मधुबनी में हुई हिंसा की जाँच क्यों 15 दिन के भीतर ही होने लगी? इसलिए नहीं क्योंकि डॉक्टरों के पास पैसा है रसूख है और वे सरकार का मुँह,आँख और कान पैसों से बंद कर सकने में सक्षम हैं?

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तात्कालिक घटना पर अच्छा प्रतिक्रियात्मक, कटाक्षपूर्ण आलेख; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! "काफी समय पहले महनार में अजंता सर्कस लगा था। तभी एक नए हाथी को सर्कस में शामिल किया गया। जोर-शोर से लाउडस्पीकरों से प्रचार किया गया कि सर्कस में लाया गया हाथी कमाल का है इसलिए यह कमाल के करतब भी दिखाएगा, जैसे-यह फुटबॉल खेलेगा,सूंड से बल्ला पकड़कर क्रिकेट खेलेगा,गेंदबाजी भी करेगा,बाबा रामदेव की तरह योगासन भी करेगा इत्यादि। सर्कस देखने के लिए घोषित तिथि को लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बैठे हुए लोगों से कई गुणा ज्यादा संख्या ऐसे दर्शकों की थी जो खड़े थे। फिर बेकरारी भरा वह पल भी आया जब उक्त हाथी को प्रदर्शन के लिए उपस्थित किया गया। सामने एक फुटबॉल रखा गया जिसे हाथी को किक करना था। हाथी आया और चुपचाप खड़ा हो गया। प्रशिक्षक ने कई-कई बार बार-बार आवाज लगाई लेकिन हाथी अपनी जगह से हिला ही नहीं। ईधर दर्शकों का धैर्य भी जवाब देने लगा था। वे अपना गुस्सा बेजान कुर्सियों पर उतारने लगे। अंत में जब अंकुश से हाथी के मस्तक पर प्रहार किया गया तो उसने अपने पिछले पैरों को मोड़ लिया और पहले तो पटाखा छूटने की-सी धमाकेदार ध्वनि उत्पन्न करनेवाला गैस-विसर्जन किया और फिर बैठ गया। और तभी हमारे राज्य वैशाली जिले में एक नई कहावत ने जन्म लिया-हाथी अयलन (आया) हाथी,हाथी पदलक (पादा) पोएं। रविवार को कांग्रेसरूपी हाथी (बतौर खुर्शीद साहब) द्वारा केंद्र सरकार में किया गया विस्तार और हेर-फेर भी कुछ ऐसी ही घटना है।"

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के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

आदरणीय ब्रज किशोर सिंह जी, "राम की शक्ति पूजा" आधुनिक हिन्दी काव्य की सर्वाधिक ऊर्जावान कविता है | नवरात्रि के दिनों में उसका सस्मरण कर आप ने शक्ति-पूजा के महत्त्व को और अधिक बढ़ा दिया है | परन्तु आज जो लगभग पूरे भारत में बाज़ार-बाजार शक्ति-पूजा का भड़काऊ आयोजन हो रहा है, उसमे रावणों की संख्या अधिक है | इधर हर साल मूर्ति-विसर्जन की यात्रा में उनका और विकृत रूप देखने को तब मिलता है, जब उनकी जमात "मुन्नी बदनाम हुई" और ऐसे अनेक अश्लील गानों के कैसेट पर नशे की हालत में बड़े भद्दे ढंग से नाचती-थिरकती हुई शक्ति-रथ के आगे-आगे चलती है | रावण ने तो फिर भी सीता माँ को अशोक वाटिका में सुरक्षित रखा था, पर इन नव रात्रि के दिनों में सहमति की स्थिति में कंडोम की बिक्री और असमति की स्थिति में बलात्कार की संख्या बढ़ जाती है | दूसरी तरफ राजनीति के रावण सारी हदें पार करे हैं और रामादल के रूप में "अन्नाओं" की जनसंख्या सिर्फ "फैफिया" रही है, कुछ सार्थक-निर्णायक कर पायेगी बड़ा संदेह है | इसलिए विकृत भारतीय राजनीति के लंकाई उत्कर्ष की इस स्थिति में धड़कनें बढ़ती जा रही हैं कि आखिर कब शक्ति रावण-दल को त्याग रामादल की ओर उन्मुख होगी, जैसा कि निराला की 'राम की शक्ति-पूजा " में अंतिम परिदृश्य आता है -- "होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन ! कह महा शक्ति राम के वदन में हुई लीन |" इतने सामयिक, सटीक और पौराणिक-साहित्यिक प्रसंग से परिपुष्ट आलेख के लिए हार्दिक साधुवाद एवं नवरात्रि की शुभ कामनाएँ !

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आदरणीय श्री ब्रज किशोर सिंह जी , सादर ! अरविन्द के पास न खोखले वाडे हैं और न ही कोई घुट्टी है लेकिन वो आगे चले जा रहे हैं , जैसे मदमस्त हाथी चला जाता है ! मैं हालाँकि ज्यादा नहीं कहूँगा - लेकिन मेरी जब अरविन्द से पहली मुलाकात हुई थी ( वो हमारे कोलेज में आये थे अप्रैल २०११ में ) तब कुछ लोगों को उनकी सरलता और साधारण वेशभूषा देखकर लगा नहीं था की वो आगे की रेस का घोडा है ! बन्दे ने , एक गिलास पानी पीकर लोगों को जीने की नयी उम्मीद दे दी और मैं अपने जीवन काल में इतना साधारण व्यक्ति नहीं देखा ! मैं तब से उनके साथ हूँ ! मैं जानता हूँ उनका रास्ता न केवल कठिन है बल्कि खतरों से भी भरा है लेकिन नयी उम्मीद और नया सवेरा किसी न किसी को तो लाना ही होगा ! बहुत सार्थक लेखन

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आदरणीय ब्रज किशोर सिंह जी, आप का आलेख बड़ा सामयिक और पठनीय है | नारियों के मूलत: चार स्वरूप हैं-- माता, भगिनी, भार्या और पुत्री | देश-दुनिया में नारियों के अपमान की बड़ी-बड़ी हो रही घटनाओं से मन विदीर्ण हो जाता है | मेरा नारियों के चारों स्वरूपों से यही आग्रह है के वे दो पैरों वाले लम्पट कुत्तों से सदैव साधान रहें-- सावधानी हटी, दुर्घटना घटी | सरकार, नेताओं, अफसरों, माफियाओं, ठेकेदारों की जमात के लम्पट बड़े ताकतवर होते हैं | विलासी पण्डे-पुजारियों-मठाधीशों में इनकी अच्छी-खासी संख्या है | बिगड़ैल विद्यर्थियों में लम्पटई का फैशन आज-कल उफान पर है | यहाँ तक कि मनोरोगी शिक्षकों-पादरियों तक में इनकी संख्या पाई जाती है | फिर क़ानून के रखवाले कुछ पुलिसिया लम्पट सोचते हैं कि हम ही पीछे क्यों रहें | किस-किस की बात करें और किस-किस छोड़ें | किन्तु बड़ी चिंता की बात यह कि तमाम घटनाओं और मीडिया द्वारा उन्हें उजागर करते रहने के बावजूद नारियाँ अपेक्षाकृत सावधान नहीं रहतीं और घटनाएँ होती जाती हैं | आप ने समस्या के साथ अच्छे सुझाव भी दिए हैं | शेष और बहुत-कुछ चिंतन के लिए पत्थर उछाला है | वन्धुवर, हार्दिक बधाई व साधुवाद !

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के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: जैनित कुमार वर्मा जैनित कुमार वर्मा

पता नहीं सरदार जी कहाँ जाना चाहते हैं? पास में होते तो ऊंगली पकड़वाकर जानने की कोशिश करता। वैसे उनको ऊंगली पकड़वाना भी मेरे लिए कम खतरनाक नहीं होता। हम भारतीयों ने उनको राजनीति में नौसिखिया जानकर अपनी ऊंगली ही तो पकड़वाई थी और अब उन्होंने हमारी गर्दनों को न केवल जकड़ ही लिया है बल्कि दबा देने पर भी तुल गए हैं। हम समझे थे कि सरदार जी राजनीतिज्ञ तो हैं नहीं कि हमारे साथ राजनीतिज्ञों जैसी बेशर्मी और धोखेबाजी दिखाएंगे। सचमुच हमने उनको यह जानते हुए भी कितना अण्डरस्टिमेट किया कि उनको आजकल अण्डरयुक्त शब्द बिल्कुल भी पसन्द नहीं है! तो मैं कह रहा था कि नवंबर-दिसंबर में मनमोहन जी की पाकिस्तान जाने की योजना तो है मगर साथ में लौटकर भारत आने की भी योजना है। वहाँ घर-बार तो रहा नहीं कहाँ रहेंगे? साथ ही उन्होंने भारत में रहते हुए पिछले 8 सालों में भारत की जिस तरह से दुर्गति की है उसे देखते हुए पाकिस्तान शायद ही उन्हें अपने देश में बसाने या शरण देने का जोखिम ले। सरदारजी आगरा भी जा सकते हैं। उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए वहाँ उन्हें सीधा प्रवेश भी मिल जाएगा। जनाब डीजल और गैस का दाम बढ़ाकर महंगाई को नियंत्रित कर रहे हैं और 22 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी छीनकर रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। बहुत सही सवाल उठाये हैं आपने श्री ब्रज किशोर जी ! बस इतना ही कहना चाहता हूँ की जैसे गोर्बाचोव ने रूस का नाश करके दम लिया इसी तरह मनमोहन सिंह भी इस देश का नाश करके ही जायेगा ! मुबारक हो , हम अपनी बर्बादी की ओर अग्रसर हो रहे हैं ! बेहतरीन लेख

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आप ने गांधी जी को अच्छी तरह पढा है । गांधी पर का अभी का वार देखिए । प्रचार किया जाता है की गांधी मरते समय " हे राम " नही बोले थे । " हे राम-रहीम " बोले थे । भगदड के कारण " रहिम " किसीने सुना नही । ये ये दावा ठोक रहा है उन के ही मित्र गोरा गांघी, जो आफ्रिका से उन के साथ ही भारत आये थे, के सुपुत्रने । ये महाशय खूद आज मरने की उमर के हो गये हैं । मरने से पहले ये वार कर दिया । कहता है गांधी तो हे राम-रहीम ही बोल सकते थे, गांधी से ही उसने सुना था की " मैं जब मरुंगा तो राम रहिम ही बोलुंगा " । खूद गांधी के लिखे, उन के समकालीन लेखकों के लिखे अरबों खरबों शब्द आज दुनियामें घुम रहे हैं । किसीने ये श्ब्द नही पढे । गांधी कैसे भुल सकते हैं ये शब्द अपनी जीवनी की किताब में ? ब्रज किशोर भाई, आप की आदत नही है कोमेंट का जवाब देने की । देते रहीए, अच्छा रहेगा ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

ब्रज किशोर साहेब,सादर नमस्ते | आपके लेख का एक भाग मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगा जिसे मैं यहाँ पेस्ट कर रहा हूँ ,उसके नीचे अपना विचार लिख रहा हूँ "समाज के ऊपरी वर्ग का अगर नैतिक पतन होता है तो निचला तबका भी सर्वथा अप्रभावित नहीं रह पाता। समाज के नैतिक क्षरण को रोका जा सकता है लेकिन यह काम है बड़ा मुश्किल;इस उपभोक्तावादी और भोगवादी युग में तो और भी कठिन। इसके लिए समाज को और व्यक्ति को निरा भौतिकवाद से अध्यात्मवाद की ओर उन्मुख करना पड़ेगा। हमारी पाठ्य-पुस्तकों में तो आज भी नैतिक शिक्षा की सामग्री अटी-पटी पड़ी है लेकिन हमारे जीवन से,नित्य-कर्म से नैतिकता गायब-सी हो गई है। मैंने गायत्री परिवार से जुड़े ऐसे कई समृद्ध लोगों को देखा है जो दैनिक जीवन में परले दर्जे के धूर्त हैं। ऐसे में एक मार्ग एकला चलो रे का भी हो सकता है। अगर प्रत्येक व्यक्ति अकेले भी धर्म के मार्ग पर चलने का उद्यम करने को उद्धत होता है तो एक बार फिर से समाज का नैत