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मोदी सरकार, काम बहुत है समय है थोडा

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मित्रों, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी को तीन साल पहले गुजरात छोड़कर केंद्रीय राजनीति में आए. यह पहली बार हुआ कि एक वर्तमान मुख्यमंत्री देश का प्रधानमंत्री बना. उनको चुनने का कारण साफ था गुजरात के बाहर मोदी की कार्यशैली, निर्णय लेने की क्षमता, कुछ नया करने की इच्छाशक्ति और भविष्य को ध्यान में रखकर तकनीक का प्रयोग आदि की खबरें जो आई उसने लोगों के दिलोदिमाग पर एक ही छाप छोड़ी, अबकी बार मोदी सरकार.पहले लोग गुजरात के बाहर मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के जानते थे. अब लोग एक पीएम के रूप में नरेंद्र मोदी को जानते और समझने लगे हैं. पिछले तीन सालों में पीएम मोदी के प्रति लोगों का लगाव कुछ ऐसा बढ़ा है कि उनकी लोकप्रियता का ग्राफ नीचे आने का नाम ही नहीं ले रहा है. विपक्ष आज भी इस बात से परेशान है.

मित्रों,शायद ही इससे पहले किसी प्रधानमंत्री का स्वच्छता के प्रति इतना झुकाव देश ने देखा होगा. खुद झाड़ू लेकर मैदान में उतरना और लाखों लोगों को इसके लिए प्रेरित करना आसान काम नहीं है. लेकिन पीएम मोदी ने बखूबी कर दिया. परिणाम कितना मिला इस बारे में ज्यादा नहीं कहा जा सकता, लेकिन देश में लोग इस बारे में प्राथमिकता से विचार जरूर करने लगे हैं.

मित्रों,पीएम नरेंद्र मोदी काफी मेहनती है. कहा जाता है कि दिन में 18 घंटे वह काम करते हैं. समय की पाबंदी पसंद करते हैं. जब से सत्ता में आए इन्होंने सरकारी कर्मचारियों में इसे लागू करवाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी. कई मंत्रालयों में जहां कर्मचारी १२ बजे के बाद दिखाई देते थे और 3 बजे तक कुर्सियां खाली होना शुरू हो जाती वहां की परिस्थिति बिल्कुल बदल गई है. पीएम मोदी ने आदेश देकर सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन लगाने के आदेश दे दिए.

मित्रों,नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर के हिस्से में सर्जिकल स्ट्राइक की मंजूरी दी और भारतीय सेना ने पहली यह कारनामा कर पूरी दुनिया को अचरज में डाल दिया.

मित्रों,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही यह प्रयास आरंभ किए कि भ्रष्टाचार पर पूर्णतया अंकुश लगे. इसके लिए सरकार ने सभी सरकारी भुगतान ऑनलाइन करने का निर्णय लिया. टेंडरों को पूरी तरह ऑनलाइन करने का आदेश दिया. इस प्रकार के कई आदेश सरकार दिए और इसकी उपलब्धि कितनी है इस बारे में ठोस नहीं कहा जा सकता है. कहा जा सकता है तो सिर्फ इतना कि पिछले तीन साल में अभी तक सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा है. जबकि पिछली सरकार में मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक पर आरोप लगते रहे.

मित्रों,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर को तत्कालीन 500 और 1000 के नोट को बंद करने का ऐलान किया. देश की पूरी अर्थव्यवस्था जैसे रुक गई. पीएम ने लोगों ने दो महीने का समय मांगा और लोगों ने दिया. लोगों को काफी कष्ट झेलने पड़े. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाने का प्रयास किया. नोटबंदी को गलत कदम करार दिया. चुनाव में भुनाने का प्रयास भी लेकिन यह लोगों का मोदी से विश्वास कम नहीं हुआ.

मित्रों,पीएम मोदी अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी सजग हैं. वह सुबह उठकर योग करते हैं. उन्होंने पूरी दुनिया में योग दिवस मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से संपर्क किया और भारत के नाम एक अंतरराष्ट्रीय सफलता लगी. इतना ही नहीं वह लगातार लोगों से यह अपील कर रहे हैं कि वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें.

मित्रों,जब प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे तभी से वह लगातार सोशल मीडिया के जरिए लोगों से जुड़े रहे हैं. मोबाइल तकनीक और सूचना तकनीक का प्रयोग कामकाज में करने के वे तभी से पक्षधर रहे हैं ताकि पारदर्शिता बने और काम सहज हो. यह प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की देश को एक देन है कि भारत में राष्ट्रपति का एक ट्विटर हैंडल बना. पीएमओ का ट्वीटर हैंडल, पीएम का, सभी मंत्रालयों और मंत्रियों को ट्वटीर से लोगों से जुड़ने का आदेश दिया गया और सभी को सक्रियता से इससे जुड़ने की बात कही गई. परिणाम साफ है कि विदेश मंत्रालय से लेकर रेल, और कई अन्य मंत्रालयों में लोगों ने ट्विटर के जरिए अपनी समस्याओं का समाधान किया. कई बार तो बड़ी समस्याओं का समाधान एक ट्वीट से हो गया. उससे से बड़ी बात समय पर लोगों को सुविधा मिली और लोगों ने पीएम की इस मुहिम का लाभ उठाया।

मित्रों,मोदी डिजिटल भारत के सपने को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. सरकार के सभी विभागों को डिजिटलाइजेशन के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे पर्यावरण से लेकर धन की हानि दोनों को बचाया जा सकता है. कई सरकारी काम अब इस माध्यम से होने लगे हैं. इतना ही नहीं कई ऐसे फॉर्म को सरल किया जिसके चलते पहले लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता था.

मित्रों,पीएम ने न्यू इंडिया की संकल्पना की है. उन्होंने इसके लिए कैशलेस भारत की बात कही है. वह चाहते हैं कि देश में नकदी का चलन कम-से-कम हो. यह सबसे बड़ा माध्यम है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का. पीएम को कितनी कामयाबी मिली, या मिलेगी यह तो साफ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन लोगों ने माना कि पीएम भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत किलेबंदी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

मित्रों,आजादी के पहले अंग्रेजों ने भारत के लिए कई कानून बनाए. आजादी के बाद भी हजारों की संख्या में इस प्रकार के कानून भारत में चलते रहे. कई ऐसे कानून भी हैं जिनकी अब आवश्यकता ही नहीं रही. आजादी के 70 से भी ज्यादा साल हो गए. कई सरकारें आईं लेकिन किसी ने भी इस ओर विचार नहीं किया. नरेंद्र मोदी सरकार ने कई ऐसे कानून रद्द कर दिए जिनकी अब कोई जरुरत नहीं है. इस तरह 1000 से ज्यादा कानून रद्द कर दिये गए हैं. वे अपनी इस मुहिम में रोज आगे बढ़ रहे हैं. उनका मानना है कि कई गैरजरूरी कानून लोगों के लिए दिक्कत पैदा करते हैं.

मित्रों,योजना आयोग अब इतिहास हो गया है. इसके स्थान पर पीएम मोदी ने नीति आयोग का गठन किया है. जब मोदी गुजरात के सीएम थे तब योजना आयोग, उसकी कार्यशैली और राज्यों से व्यवहार उन्हें उचित नहीं लगा. राज्यों से केंद्र के बेहतर समन्वय के लिए उन्होंने नीति आयोग का गठन किया.

मित्रों,अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद को नीति के रूप में प्रयोग कर रहे पाकिस्तान को भारत ने अलग-थलग कर दिया. आज पाकिस्तान पर अमेरिका से लेकर कई देशों ने दबाव बनाया है कि वह आतंकवाद को प्रशय देना बंद करे. इस काम में मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है.

मित्रों,पिछले काफी समय से चीन भारत के बड़े भाई की भूमिका में आने के प्रयास में रहा. एक तरफ जहां वह पाकिस्तान की मदद कर रहा है वहीं भारत के कई हिस्से पर अपना दावा करता रहा है. एलएसी को वह स्वीकार नहीं कर रहा है. लेकिन कई दशकों बाद भारत ने लेह में 100 टैंक भेजे और युद्धाभ्यास किया. वहीं अरुणाचल प्रदेश के विकास और सीमा पर सड़क निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया गया.

मित्रों,मगर ऐसा भी नहीं है कि मोदी सरकार किसी मोर्चे पर विफल न हुई हो. टूटे और अधूरे वादों की एक लंबी फ़ेहरिस्त है, ख़ास तौर पर रोज़गार और विकास के मामले में, सरकारी आँकड़े ही चुगली कर रहे हैं कि रोज़गार के नए अवसर और बैंकों से मिलने वाला कर्ज़, दोनों इतने नीचे पहले कभी नहीं गए । स्वयं केंद्र सरकार के लेबर ब्यूरो के आँकड़े कहते है कि मोदी सरकार अब तक सिर्फ 9 लाख 97 हजार नौकरियां दी हैं। रोजगार को बढ़ाना तो दूर की बात है, बड़े महकमे में जो पद सालों से खाली है वो भी अब तक नहीं भरे जा पाए हैं।

मित्रों,भाजपा के घोषणा पत्र में जो वायदे किए गए थे उनमें हर साल दो करोड़ युवाओं को रोज़गार देना, किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य लागत से दोगुना मूल्य देना, विदेशों में जमा कालेधन की सौ दिनों के भीतर वापसी, भ्रष्टाचार के आरोपी सांसदों-विधायकों के मुकदमों का विशेष अदालतों के जरिए एक साल में निपटारा, महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण, गंगा तथा अन्य नदियों की सफाई, जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 का खात्मा, समान नागरिक संहिता लागू करना, कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी, गुलाबी क्रांति यानी गोकशी और मांस निर्यात पर प्रतिबंध, देश में सौ शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में तैयार करना आदि प्रमुख वायदे थे। इन सभी वादों में से अधिकांश वादों में मोदी सरकार असफल है और कुछ मुद्दों पर प्रयासरत है किंतु अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं मिले है। हालाँकि कई स्टार्ट अप और आवास योजनाएं चलाईं गयी हैं लेकिन आज भी बैंक से इनका लाभ उठाना आसान नहीं है.

मित्रों,कई बार लगता है कि जैसे यह सरकार जनता से कुछ छिपाना चाहती है. पता नहीं वो नोट बंदी के आंकड़े क्यों छिपाना चाहती है? इसी तरह सवाल उठता है कि क्या सरकार लोकपाल को सचमुच में नियुक्त करना चाहती है? हम तो समझे थे कि यूपी की भाजपा सरकार देशभर की राज्य सरकारों के लिए एक उदाहरण साबित होगी लेकिन वहां की योजनाओं में आज भी अल्पसंख्यक कोटा बना हुआ है? मोदी सरकार ने नई जातियों को ओबीसी कोटे में शामिल करने के राज्य सरकार के अधिकार को संसद को सुपुर्द कर दिया है लेकिन क्या गारंटी है कि मोदी सरकार इसका दुरूपयोग नहीं करेगी? जिस तरह मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा समाप्त कर दिए गए प्रोन्नति में आरक्षण को फिर से लागू करने जा रही है उससे तो यही संदेह उत्पन्न होता है.

मित्रों,जिस तरह से बड़े पैमाने पर कांग्रेस के नेताओं को भाजपा में शामिल किया जा रहा है उससे तो लगता है कि आने वाले समय में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना होगी कि उसका कांग्रेसीकरण तो नहीं हो रहा है. और यह साबित करना भी होगी कि उसके लिए आज भी नेशन फर्स्ट है कुर्सी नहीं? और ये सब साबित करने के लिए उसके पास बहुत कम समय शेष बचा है,बहुत कम.



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