ब्रज की दुनिया

ब्रज की दुनिया में आपका स्वागत है. आइये हम सब मिलकर इस दुनिया को और अच्छा बनाने का प्रयास करें.

678 Posts

1380 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1147 postid : 670

कृपालु,दीनदयाल,गरीबनवाज राहुल बबुआ

  • SocialTwist Tell-a-Friend

rahul

मित्रों,भारत की सुपर प्राइम मिनिस्टर इटली से आयातित राजमाता सोनिया गाँधी की आखों के तारे राहुल बबुआ जबसे राजनीति में आए हैं तभी से कृपालु,दीनदयाल,गरीबनवाज बने हुए हैं.जहाँ कहीं भी किसानों,दलितों और मुसलमानों पर प्रदेश सरकार डंडा-गोली चलवाती है राहुल बबुआ तुरंत वहां पहुँच जाते हैं.इस दौरान कुछ देर झोपडिया में आराम करते हैं चटाई बिछाकर.अगर चटाई नहीं मिले तो खटिया से भी काम चला लेते हैं.कभी-कभी तो रातभर के लिए खटिया खाली नहीं करते हैं चाहे घरवालों को जमीन पर ही क्यों न सोना पड़े.
मित्रों,राहुल बबुआ की संवेदना का जवाब नहीं.बड़े ही जागरूक इन्सान हैं.जिस प्रदेश में उनकी खुद की सरकार होती है वहां लाख पुलिसिया अत्याचार,अनाचार,बलात्कार हो जाए वे नहीं फटकते.फटे में पांव वे तभी डालते हैं जब प्रदेश में विपक्षी दल की सरकार हो.हाँ,वे पीड़ितों-गरीबों पर कृपा करते समय एक और बात का भी ख्याल रखते हैं कि उक्त प्रदेश में चुनाव नजदीक है या नहीं.चुनाव अगर निकट होता है तब हो सकता है कि राहुल बबुआ पीड़ितों पर दोबारा भी कृपा करें  अन्यथा एक बार के दौरे से ही बबुआजी की संवेदना तृप्त हो जाती है.
मित्रों,अभी उत्तर प्रदेश में चुनाव निकट है और ऐसे में हिटलरी मिजाज वाली मायावती की सरकार ने भट्ठा परसौल में अत्याचार की सारी हदें पर कर दीं.ऐसे में लाजिमी था कि राहुल बबुआ उपरोक्त गाँव का दौरा करें और एक बार नहीं दो या दो से ज्यादा दफा करें.इसी बीच बबुआजी ने बिहार के फारबिसगंज में पुलिस फायरिंग में मारे गए मुसलमानों के परिजनों का दर्द भी बांटा.लेकिन चूंकि बिहार में अभी चुनाव दूर है इसलिए मुझे नहीं लगता कि वे दोबारा वहां की जनता पर निकट-भविष्य में कृपावृष्टि करनेवाले हैं.आप सभी जानते हैं कि इस समय बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों प्रदेशों में विपक्षी दल की सरकार है.इसी तरह की घटनाएँ महाराष्ट्र में लगातार नियमित अन्तराल पर होती रहती हैं लेकिन चूंकि क्योंकि वहां राहुल बबुआ की पार्टी सत्ता में है वे नहीं जाते पीड़ितों का दर्द बाँटने.अपने आदमी द्वारा किया गया अत्याचार अत्याचार थोड़े ही होता है.वैदिक हिंसा हिंसा न भवति;वह तो दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन अपरिहार्य होता है.उनकी माताजी द्वारा रिमोट संचालित केंद्र सरकार की पुलिस ने रामलीला मैदान में आधी रात में सोये हुए वृद्ध-बीमार लोगों पर लाठियों-गोलियों-अश्रुगैस की बरसात कर दी;लोकतंत्र की शवयात्रा निकाल दी लेकिन राहुल बबुआ का मन थोडा-सा भी नहीं पसीजा.नहीं गए अंग-भंग हुए लोगों को अस्पताल में देखने,उनका दुःख-दर्द बाँटने.जाते भी कैसे,यह अपने लोगों की शरारत जो थी.लोकतंत्र की हत्या तो तभी होती है जब हत्यारी विपक्षी दल की सरकार हो.अपने लोगों पर तो राहुल बबुआ बड़े कृपालु हैं.कुछ भी गलत कर जाए तो बचपना समझकर आँखें मूँद लेते हैं.
मित्रों,तो ये है अपने कृपालु,दीनदयाल,गरीबनवाज ४१ वर्षीया राहुल बबुआ की संवेदनशीलता की हकीकत.आप समझ गए होंगे कि उनकी संवेदनशीलता सिर्फ वोट के लिए है उसका गरीबों व पीड़ितों के आंसुओं से कुछ भी लेना-देना नहीं है.अगर लेना-देना होता तो वे न तो पीड़ितों के प्रति भेद का भाव रखते और न ही पीड़कों को लेकर.करें भी तो क्या बेचारे अपने नायाब दिमाग से तो कुछ करते नहीं हैं जैसी सलाह उनके खानदानी चाटुकारों ने दी बबुआ ने वैसा ही कर दिया.राजनीति तो उनके खून में होना चाहिए फिर न जाने क्यों वे पिछले कई वर्षों से राजनीति का ककहरा ही सीखने में लगे हैं.ऐसे ही चलता रहा तो वह दिन भी जल्दी ही आएगा जब जनता उनके ककहरा सीखने का इंतजार करते-करते थक जाएगी और फिर से कांग्रेस पार्टी विपक्ष की अँधेरी सुरंग में चली जाएगी.जल्दी सीखिए कांग्रेसी युवराज-क का कि की कु कू बादाम,के कै को कौ कं कः राम.क का कि की………….


Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

7 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vijender के द्वारा
July 8, 2011

सही कहा हे अपने , ४१ साल का युबा , कांग्रेश का युबराज केवल उन्ही राज्यों में जाता हे जहा पर निकट भवसीय में चुनाब हो या फिर विरोधी डालो की सरकार हो/ महाराष्ट के जेथापुर में पोलिश की गोलीबारी में वह की जनता मरती हे तो सब जायज हे /वह पर जाते में उनकी माँ मरती हे कियोकी उस राज्य में उनकी अपनी सरकार हे/ दिली में सरकार के विरुद्ध रैली करते लोगो पर पोलिस अत्ताय्चार करती हे तब युबराज आपनी माँ के आँचल में मुह छिपा कर दुबक जाते हे/ मिजोरम में सरकार दुवारा प्रायोजित हिंसा की अग्नि से बचने के लिए वहा के हिन्दू रियांग समुदाय पिछले १३ साल से तिपुरा ,असाम के सर्नार्थी सिबरो में नर्किये जीबन बिता रहे हे/ परन्तु न तो कांग्रेश के युबराज और ने ही सेकुलर रुदाली ने उन सिबरो में जाकर उनकी सुरक्षित वापसी का पर्यास किया /कियोकी पीरित लोग हिन्दू समुदाय से थे /हिन्दू समुदाय वोट बैंक के रूप में विकसित नहीं हे इसलिय हिन्दुओ की किसी को परवाह नहीं हे/ जिस दिन हिन्दू एकजूट हो कर वोट देना सुरु कर देंगे उस दिन कांग्रेशी युबराज, भांड नेता, मीडिया उनकी सुध लेना सुरु कर देगा/

Pramod के द्वारा
July 7, 2011

राहुल बाबा अर्थात राओल विन्ची, अक्कल पांच साल के बच्चे के बराबर, पढाई में हर तरफ से नाकाम, फिर अब एक राजनीति ही टाइम पास के लिए धंधा बचता है. पैसा तो बहुत बाप दादा दादी ने कमाया, अब तो मीडिया और चाटुकारों की कृपा से नाम भी कमा ही लेंगे राजकुमार और बन के दिखा देंगे भारत के पी एम्. इसाई होकर भी माथे पे टीका लगवाकर, कलाई पे कलावा बाँध कर देश की जनता को भ्रमित करते हैं. वाह रे fake गांधियो. गियासुद्दीन ग़ाज़ी का लड़का नन्दलाल नेहरु बना, नेहरु का दामाद फ़िरोज़ खान छद्म गाँधी बना. फ़िरोज़ खान और मैमुना बेगम (इंदिरा) के बच्चे राजीव खान /संजीव खान के बजाय गाँधी बनते हैं. वाह क्या भानुमती का कुनबा है ?

सौरभ दुबलिश के द्वारा
July 7, 2011

मीडिया द्वारा उद्घोषित कांग्रेस के युवराज श्री राहुल गाँधी की पदयात्रा का इलेक्ट्रोनिक मीडिया द्वारा ऐसा प्रचार प्रसार किया जा रहा है जैसे राहुल गाँधी कोई महात्मा हों और देश में अमन शांति की मशाल लिए घूम रहे हों / राहुल गाँधी इतना पैदल चले,यहां पानी पिया,यहाँ ठहरे आदि अदि,इसका क्या महत्व है क्या उनको पैदल चलना मना है ,क्या उनके लिए बिसलेरी के अलावा कोई और पानी पीना मना है ?क्या उनके लिए स्वदेशी खाना खाना मना है ? जबकि मीडिया जानता है कि देश की अधिकाँश जनता इससे कहीं पैदल चलती है और सड़क के किनारे गंदे जल स्त्रोत्रों से पानी पीती है और रेलवे स्टेशन या सड़क पर रात गुजार देती है/अगर राहुल गाँधी को इतना ही पैदल चलना है क्यों नही प्रधानमंत्री के घर जाकर देश से भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके साथ और अपने परिवार जनों के साथ पद यात्रा का शुभ आरम्भ करते ? क्यों नही राहुल गाँधी देश में महंगाई के विरुद्ध पैदल चलते ? क्यों नही राहुल गाँधी विदर्भ में जाकर पैदल चलते जहाँ किसानों ने आत्महत्या की है? क्यों नही राहुल गाँधी पेट्रोल डीजल के बढ़ी कीमत के विरोध में पैदल यात्रा करते ? अगर राहुल गाँधी देख रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में अराजकता है तो क्यों नही अपनी केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल से युपी सरकार को बर्खास्त करवाते ? जब निहत्थे लोगों को रात को पीटा गया,तब तो राहुल गाँधी एसी में सोते रहे,क्यों नही इस अत्याचार के विरुद्ध पैदल चले ? उनकी सरकार की लड़ाई रामदेव से ही तो थी ,परन्तु पिटाई तो राष्ट्रवासियों की हुई.क्यों नही दिल्ली विधानसभा के सामने पैदल चले / अगर राहुल गाँधी को देश से वास्तव में प्रेम है तो क्यों नही “अन्ना हजारे” से बात करते,यह अलग बात है कि उनकी बात मंजूर हो या नही परन्तु भ्रष्टचार के विरुद्ध पैदल चलने में उनका क्या जाता,क्या भ्रष्टाचार केवल युपी में ही है ? पूरा देश कानून की इज्जत करता है परन्तु स्वयं धारा १४४ का उलग्घन करना देश में क्या सन्देश देगा ? मतलब नेता ! क्या कानून से भी ऊपर है,नेता कुछ भी अपराध करें उसको लस्सी और मलाई ,जबकि इसी धारा के उलंग्घन में रामदेव के अनुयायियों की रात को पिटाई !!! भाई वाह क्या कानून की रक्षा हो रही है,कानून भी नेताजी और जनता के लिए अलग अलग ,खैर भाई वे मीडिया द्वारा उद्घोषित युवराज है,भारत पुत्र हैं बाकि जनता उनकी गुलाम / सौरभ दुबलिश

    SB के द्वारा
    July 8, 2011

    पेहले के जमाने मे चलते फिरते हज्जाम हुआ करते थे । घर घर जा के हजामत करते थे । घर घर का समाचार घर घर पहुन्चाते थे । वो थे हमारे आज के मिडिया के परदादे । हज्जाम के बच्चोसे क्या आशा कर सकते है । ईन का बस चलता तो वो केमेरा / माईक्रोफोन उनके मालिक की सीट के निचे रख दे ताकी लोग देख सुन सके वो पादता कैसे है ।

    batata के द्वारा
    July 8, 2011

    एस बी साहब बिलकुल सही उपमा दी आपने. और जैसा आप कह रहे हैं उसी बात की कमी रह गई है, खास तौर पर टीवी मीडिया के लिए.

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 7, 2011

ब्रज किशोर जी पकने में समय तो लगता ही है अवसर दीजिये -जो कर रहे हैं कुछ अच्छा करने जा रहे साथ और भी जायेंगे कुछ करेंगे कुछ भला ही होगा -जान जोखिम में डाल देखों न उन की सभा में सुरक्षा घेरा तोड़ पिस्तौल वाला मिला -सब्र करो भाई – न जाने क्यों वे पिछले कई वर्षों से राजनीति का ककहरा ही सीखने में लगे हैं.ऐसे ही चलता रहा तो वह दिन भी जल्दी ही आएगा जब जनता उनके ककहरा सीखने का इंतजार करते-करते थक जाएगी और फिर से कांग्रेस पार्टी विपक्ष की अँधेरी सुरंग में चली जाएगी.जल्दी सीखिए कांग्रेसी युवराज-क का कि की कु कू बादाम,के कै को कौ कं कः राम.क का कि की– और एक बात उन्हें ४१ वर्षीया तो मत लिखो -वर्षीय लिखो न – भ्रमर ५

shaktisingh के द्वारा
July 7, 2011

मुझे लगता है कि जिस तरह से पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ छीटाकशी हो रही है राहुल उसे धोने की कोशिश कर रहे है. अब वह धो पाते है या नहीं वह तो आने वाले चुनाव में पता चलेगा.


topic of the week



latest from jagran